RBI की ओर से महंगाई के मोर्च पर आम आदमी को तगड़ा झटका दिया गया है। मई में थोक महंगाई के बाद खुदरा महंगाई में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खुदरा महंगाई दर मई में बढ़कर 6.3 फीसदी हो गई है। जबकि अप्रैल में 4.23 फीसदी थी यानी अप्रैल के मुकाबले मई में खाने-पीने की चीजें महंगी हुईं।

मई में बेतहाशा खुदरा महंगाई दर बढ़ने के पीछे पेट्रोल-डीजल और खाने-पीने की चीजें महंगी होने का असर है। मई में रिटेल महंगाई 6 महीने के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित रिटेल महंगाई दर मई में रिटेल महंगाई 6.3% रही।

गौरतलब है कि मई में महंगाई दर का आंकड़ा रिजर्व बैंक के दायरे से भी बाहर निकल गया है। आरबीआई ने दायरा 2-6 फीसद तय किया था। इससे पहले लगातार 5 महीने तक खुदरा महंगाई दर 6 फीसदी से नीचे रही थी।

मई में खाने-पीने के सामान 5.01% महंगे हुए हैं, जो अप्रैल में 2.02% ही महंगा हुआ था। सबसे ज्यादा पेट्रोल-डीजल महंगे होने की वजह से खुदरा महंगाई दर बढ़ी है।

वहीं मई महीने में थोक मूल्य आधारित महंगाई (WPI) 12.94 फीसदी की अब तक की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है। इसके पहले अप्रैल महीने में थोक महंगाई 10.49 फीसदी पर थी। लगातार दो महीने थोक महंगाई ने दो अंकों का दायरा पार किया है।

सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले साल इसी अवधि यानी मई 2020 में थोक महंगाई -3.37% थी। सरकार का कहना है कि लो बेस इफेक्ट और कच्चे तेल, पेट्रोल-डीजल के साथ अन्य ​खनिज तेल तथा मैन्युफैक्चर्ड वस्तुओं के दाम में आई तेजी की वजह से महंगाई बढ़ी है।

इस दौरान दालों में 12.09 फीसदी, प्याज में 23.24 फीसदी, फलों में 20.17, तिलहन के दाम में 35.94 फीसदी और कच्चे पेट्रोलियम के दाम में 102.51 फीसदी की बढ़त हुई है. इस दौरान पेट्रोल के दाम में 62.28 फीसदी, डीजल में 66.3 फीसदी और सब्जियों के दाम में 51.71 फीसदी की जबरदस्त बढ़त हुई है।

इसके पहले कच्चे तेल, पेट्रोल-डीजल के दाम में उछाल की वजह से अप्रैल, 2021 में थोक महंगाई 10.49 फीसदी तक पहुंच गई थी। मार्च, 2021 की तुलना में इसमें करीब 7.39 फीसदी की बढ़त हुई है।

वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च महीने में थोक महंगाई सिर्फ 3.1 फीसदी थी। इसी तरह फरवरी में थोक महंगाई 4.17 फीसदी थी।

कोरोना महामारी से वैसे ही परेशान मध्यम वर्ग के लिए महंगाई नई मुसीबत बनकर आई है। रोजमर्रा के इस्तेमाल होने वाले ग्रॉसरी आइटम यानी किराने के सामान के दाम में एक साल में जहां 40 फीसदी की बढ़त हुई है। वहीं खाद्य तेलों के दाम 50 फीसदी तक बढ़ गए हैं।