राज्य सरकार के मीन विभाग ने प्राकृतिक जलाशयों, नदी आदि में 1 अप्रैल से 15 जुलाई तक मछलियों की सुरक्षा, वृद्धि और उत्पादन के लिए असम मीन नीति 1953 और मीन पोना कानून  2005 को लागू कर निषेधाज्ञा जारी किया है। इस नियम के अनुसार गर्भवती मछलियों को मारने और जाल से मछली पकड़ने पर पाबंदी होगी।


इस निषेधाज्ञा के साथ सहमति रखते हुए जिला मीन उन्नयन अधिकारी ने लखीमपुर के टास्क फोर्स की टीम व लखीमपुर सदर थाने के अधिकारी आदित्य देवरी के सहयोग से स्थानीय मछली बाजार दैनिक बाजार के बी रोड बाजार, सीडी रोड बाजार और आम बाजार आदि में अभियान चला कर अंडायुक्त मछलियों को जब्त कर लिया।


अभियान में लखीमपुर जिला मीन उन्नयन अधिकारी डाॅ पीएम गोस्वामी, दलपति भद्देश्वर मिली सहित वर्षारानी चेतिया, लक्ष्य तामुली, धनंजय तायद, कंदर्प बरुवा, सुरेन दास, कुशल बोरा और कल्याण कोंवर शामिल थे। उपरोक्त नियम लागू करने के लिए जागरूकता अभियान चलाया गया। तेलाही उन्नयन खंड के पानीगांव चारियाली, लोहित खाबलू आदि अंचल और नाउबैशा उन्नयन खंड के राज आली आदि मछली बाजारों में अभियान चलाया गया।


बरसात के मौसम में नदी, तालाब आदि में मछलियों की वंश वृद्धि होती है। इस समय कुछ लोग मछली के पोना को पकड़ने का कार्य करते हैं जो अनुचित है क्योंकि ऐसा करने से मछलियों की वंश वृद्धि नहीं हो पाती और उनकी संख्या में ह्नास होता है। इस बात की आशंका कर लखीमपुर जिले के जिला दंडाधीश ने 144 धारा लागू कर दी है। इस धारा के अनुसार जाल की मदद से कोई मछली नहीं पकड़ सकेगा। अंडे देनेवाली मछलियों के पकड़ने पर भी रोक लगा दी गई है। यह निषेधाज्ञा 15 जुलाई तक लागू रहेगा। आदेश का उल्लंघन करनेवालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।