भारत में कोरोना वायरस से अब तक 392 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। हर दिन कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कोरोना पर काबू पाने के लिए पिछले दिनों पीएम नरेंद्र मोदी ने 21 दिनों के लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ा दिया। उधर दुनिया भर में अब तक कोरोना से 1 लाख 34 हज़ार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 20 लाख से ज्यादा लोग कोरोना संक्रमित हैं।


दुनिया के कई देशों में डेटा के जरिये ये अनुमान लगाए जाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर इस बीमारी से कितने लोगों की मौत हो सकती है। ऐसे ही एक रिसर्च में दावा किया गया है कि भारत में कोरोना संक्रमित मरीजों के जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, उससे कही ज्यादा लोग इस इस वायरस के शिकार हो चुके हैं।


अंग्रेजी अखबार के मुताबिक, ये रिसर्च लंदन स्थित इंपीरियल कॉलेज में किया गया है। रिसर्चर ने दावा किया है कि ये वायरस चुपचाप लोगों को अपनी गिरफ्त में ले रहा है। कई लोगों में इसके लक्षण भी जल्दी नहीं दिखते हैं। रिसर्च ने जो दो दावा किया है, उसके मुताबिक 22 मार्च से लेकर अगले 7 दिनों तक भारत में संक्रमित मरीजों की संख्या 16,800-23,600 के बीच थी। लेकिन सरकार की तरफ से ये आंकड़ा सिर्फ 2395 दिए गए। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 11 अप्रैल तक भारत में 119-567 लोगों की मौत हो जाएगी। लेकिन पिछले शनिवार तक ये आंकड़ा 288 पर था।


कम आंकड़ों की ये है वजह रिसर्च के मुताबिक, ये आकंड़े इसलिए कम सामने आ रहे हैं क्योंकि कोरोना के लक्षण मरीजों में काफी देर से दिख रहे हैं। पता न चलने के चलते मरीजों में इसके टेस्ट नहीं हो पाते हैं। इसके अलावा हर देश में कोरोना की टेस्टिंग भी काफी कम हो रही है। शुरूआत में दुनिया के बाकी देशों की तरह भारत में भी सिर्फ उन्हीं लोगों का टेस्ट हो रहा था जो विदेश से आ रहे थे।


लॉकडाउन से पहले भारत में संक्रमित मरीजों का अनुपात 4 का था। लेकिन अब ये घटकर 3 पर आ पहुंचा है। यानी हर एक मरीज से औसतन 3 मरीज संक्रमित हो रहे हैं। बीमारी को फैलने से रोकने के लिए ये जरूरी है कि संक्रमित मरीजों की संख्या 1 से नीचे आ जाए। फिलहाल हर दिन तेज़ी से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ रही है।