उच्चतम न्यायालय ने मेघालय की एक गैरकानूनी खदान में पिछले साल 13 दिसंबर को फंसे 15 खनिकों के शव निकालने का अभियान बंद करने की अनुमति दे दी। न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति बीआर गवई की पीठ ने इस खदान में फंसे खनिकों को बचाने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान इस संबध में आदेश पारित किया।



इस मामले में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने पीठ से कहा कि राज्य सरकार ने इस अभियान को बंद करने के लिए आवेदन दाखिल किया है। उन्होंने कहा, ' हम इसका विरोध नहीं कर रहे हैं।' याचिकाकर्ता ने न्यायालय से कहा कि खदानों के मामले में एक मानक संचालन प्रक्रिया होनी चाहिए जिसका मेघालय जैसी किसी भी आपात स्थिति के मामले में पालन किया जा सकता है।


पीठ ने कहा कि खादानों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया होनी चाहिए जिसका मेघालय जैसी किसी भी आपात स्थिति के मामले में पालन किया जा सकता है। पीठ ने कहा कि खदानों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया संबंधित मुद्दे पर चार सप्ताह बाद विचार किया जाएगा।


शीर्ष अदालत ने इस साल मार्च में याचिकाकर्ता को खदान में फंसे खनिकों के परिजनों से यह बात पता लगाने का निर्देश दिया था कि अब तक शव पूरी तरह से सड़ गल गए होंगे तो क्या वे अभी भी इन्हें निकलवाना चाहते हैं। इससे पहले, न्यायालय को बताया गया था कि रिमोट से संचालित पानी के भीतर चलने वाले वाहन ने खादान में तीन शवों को खोजा था।