भारत की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज पर लाखों करोड़ रूपयों का कर्ज है लेकिन अब उसें निवेश मिल रहा है। आपको बता दें कि  रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने मार्च 2021 तक कंपनी को कर्जमुक्त करने का फैसला किया था और वे इस दिशा में काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। इस कंपनी में पिछले कुछ सप्ताह में पांच अलग-अलग निवेशकों ने 78 हजार करोड़ से ज्यादा का निवेश किया है। इसके साथ ही कई निवेशकों के साथ डील आखिरी चरण में है। ऐसे में अब यह कंपनी के लिए जल्द ही कर्ज मुक्त होने जा रही है।
बताया गया है कि यदि सऊदी अरामको के साथ रिलायंस के सौदे में देरी भी होती है, तो भी वह अपने पूरे शुद्ध कर्ज (नेट डेट) का भुगतान करने की स्थिति में होगी। मुकेश अंबानी के नियंत्रण वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपनी डिजिटल इकाई में अल्पांश हिस्सेदारी फेसबुक तथा निजी इक्विटी कंपनियों मसलन सिल्वर लेक, विस्टा इक्विटी, केकेआर और जनरल अटलांटिक को बेचकर कुल 78,562 करोड़ रुपये की राशि जुटाई है। इसके अलावा कंपनी राइट्स इश्यू के जरिये भी 53,125 करोड़ रुपये जुटा रही है।
कंपनी को लेकर एडलवाइज की एक शोध रिपोर्ट में कहा गया है कि हालिया सौदों के बाद हमने रिलायंस इंडस्ट्रीज के बही-खाते का विश्लेषण किया है। कंपनी ने पिछले माह के दौरान इक्विटी के रूप में 1.3 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं। हमारा अनुमान है कि यदि अरामको सौदे में देरी भी होती है, तो भी कंपनी 2020-21 में अपना समूचा 1.6 लाख करोड़ रुपये का नेट डेट चुका पाएगी।
यह भी कहा गया है कि कंपनी का अजस्टेड नेट डेट (कुल कर्ज) 2.57 लाख करोड़ रुपये के करीब है और इसे चुकाने में अधिक समय लगेगा। एडलवाइज ने कहा है कि कंपनी की दूरसंचार इकाई जियो का कैपिटल एक्सपेंडिचर काफी हद तक पूरा हो गया है। ऐसे में रिलायंस इंडस्ट्रीज तेल और गैस क्षेत्र से कम आय के बावजूद 2020-21 में 20,000 करोड़ रुपये का मुक्त नकदी प्रवाह (फ्री कैश फ्लो) हासिल कर पाएगी।
ब्रोकरेज कंपनी ने कहा, 'हमारा अनुमान है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज जियो में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी। इसके अलावा राइट्स इश्यू से मिलने वाली राशि, ईंधन के खुदरा कारोबार में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी भारत पेट्रोलियम को 7,000 करोड़ रुपये में बेचने आदि के बाद कंपनी के पास 1.3 लाख करोड़ रुपये की नकदी होगी। ऐसे में कंपनी 2020-21 में कर्जमुक्त होने के लक्ष्य को हासिल कर पाएग