बदरंग होते लाल किला और कुतुब मीनार को अब नए सिरे से संवारा जायेगा। ताकि वहां आने वाले टूरिस्टों के लिए सुविधाएं विकसित की जा सकें। एनबीसीसी के चेयरमैन के मुताबिक, पुराना किला में एनबीसीसी ने महज तीन से चार महीने में काम पूरा किया है। अब इसी तरह से लाल किला और कुतुब मीनार को भी और दर्शनीय बनाने के लिए यह कोशिश की जाएगी। 

लाल किला और कुतुब मीनार में लाइटिंग सिस्टम को सुधारा जाएगा और वहां नई सुविधाएं जोड़ी जाएंगी। इनमें पार्किंग से लेकर रेस्तरां, ग्रीनरी, टूरिस्टों के बैठने के लिए व्यवस्था भी होगी।  इसके अलावा सीसीटीवी, पेयजल, टॉइलट, मॉन्यूमेंट लाइटिंग और लैंडस्केपिंग भी की जाएगी। 

बता दें कि कुतुब मीनार और लाल किला में लगी लाइटें बेहद पुरानी हो चुकी हैं, जिसकी वजह से रात में इन दोनों ऐतिहासिक धरोहरों को नज़ारा अच्छा नज़र नहीं आता। 

कुतुब मीनार ईंटो से बनी दुनिया की सबसे ऊंची इमारत है। दिल्ली के महरौली इलाके में छत्तरपुर मंदिर के पास स्थित कुतुब मीनार की ऊंचाई करीब 73 मीटर है और इसमें पांच मंजिले हैं। इसका निर्माण दिल्ली के पहले मुस्लिम शासक कुतुबुद्धीन ऐबक ने 1200 ई. में करवाया था। ऐबक ने सिर्फ इसकी पहली मंजिल का निर्माण करवाया था, जबकि उनके बेटे ने इसकी तीन मंजिलें बनवाईं, जबकि 1368 में फिरोजशाह तुगलक ने पांचवीं और अंतिम मंजिल बनवाई। कुतुब मीनार का निर्माण लाल पत्थर और मार्बल से किया गया था। 

कुतुब मीनार में हफ्तेभर एंट्री हो सकती है और इसकी टाइमिंग सुबह 6 बजे से शाम के 6 बजे तक है। यहां आप आराम से 1 से 2 घंटे बिता सकते हैं। भारतीय पर्यटकों के लिए फीस 30 रुपये है, जबकि विदेशी पर्यटकों के लिए टिकट की कीमत 500 रुपये रखी गई है। 

ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण लाल किले का निर्माण शाहजहां ने करवाया था। लाल रंग के बलूआ पत्थर से बने होने के कारण इसका नाम लाल किला पड़ा। इसके अंदर मौजूद दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, रंग महल, खास महल, हमाम, नौबतखाना, हीरा महल और शाही बुर्ज यादगार इमारतें हैं। लाल किले के निर्माण में करीब 10 साल का वक्त लगा। इसका निर्माण 1638 से 1648 के बीच हुआ और तब उसका नाम किला-ए-मुबारक था। लाल पत्थर से बने इस किले का आज भी कितना अधिक महत्व है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हर साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से ही देश को संबोधित करते हैं।