बीते 1 फरवरी को आम बजट में सरकार ने राजकोषीय घाटे के अनुमान को बढ़ा दिया है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.8 फीसदी कर दिया है। बढ़ते राजकोषीय घाटे का असर वही होगा जो आपकी कमाई के मुकाबले खर्च बढ़ने पर होता है। खर्च बढ़ने की स्थिति में सरकार को कर्ज लेना पड़ता है। इस घाटे को कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक से उम्‍मीद की जा रही थी।

अब आरबीआई ने बड़ा झटका दिया है। दरअसल, RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि बढ़ते राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए केंद्रीय बैंक की अधिक नोट छापने की कोई योजना नहीं है। बता दें कि बजट में राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष में 3.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है, जबकि पिछले बजट में इसके 3.3 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई थी। यह लगातार तीसरा साल है, जब सरकार ने राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को संशोधित किया है।

इसके अलावा आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने सरकार को सुझाव दिया है कि कोरोना वायरस के प्रसार के आर्थिक प्रभावों से निपटने से लिए आकस्मिक योजना तैयार रखी जानी चाहिए। रिजर्व बैंक ने कहा कि चीन में कोरोना वायरस शुरू होने और दुनिया के विभिन्न देशों तक इसके फैलने का पर्यटन और व्यापार पर प्रभाव पड़ेगा। इसका शेयर बाजार और कच्चे तेल का बाजार पर भी असर होगा। बता दें कि आरबीआई ने महंगाई और राजकोषीय घाटे के आंकड़े को देखते हुए लगातार दूसरी बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है।

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