रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रेपो दर तथा अन्य नीतिगत दरों को यथावत रखने का फैसला किया है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांता दास की अध्यक्षता में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समीति की आज समाप्त तीन दिवसीय बैठक में सभी नीतिगत दरों को अपरिवर्तित रखने का निर्णय किया गया। रेपो रेट में बदलाव नहीं किया है। इसे 4 फीसदी पर बरकरार रखा गया है। इससे होम सहित दूसरे लोन की ईमआई घटने की उम्मीद खत्म हो गई है। 

बता दें कि रेपो दर को चार प्रतिशत, रिवर्स रेपो दर को 3.35 प्रतिशत, मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी दर को 4.25 प्रतिशत और बैंक दर को 4.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है। नकद आरक्षी अनुपात चार प्रतिशत और एसएलआर 18 प्रतिशत पर बना रहेगा। बैठक के बाद दास ने बताया कि वित्त वर्ष 2021-22 में वास्तविक जीडीपी की विकास दर 9.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर आ रही है। विदेशों से भी मांग आ रही है। साथ ही मौसम विभाग ने इस साल सामान्य मानसून का पूर्वानुमान जारी किया है। आने वाले दिनों में कोविड-19 टीकाकरण भी गति पकड़ेगा। ये सभी कारक अर्थव्यवस्था को गति देंगे।

गौरतलब है कि आरबीआई के रेपो रेट घटाने पर लोन  सस्ता हो जाता है। ठीक इसके उलट रेपो रेट बढ़ने पर लोन महंगा हो जाता है। आरबीआई हर दो महीने पर रेपो रेट की समीक्षा करता है। रेपो रेट वह दर है जिस पर बैंक आरबीाई से उधार लेते हैं। आम तौर पर बैंकों के लोन की दर रेपो रेट पर निर्भर करती है। रेपो रेट में बदलाव का फैसला एमपीसी के सदस्य करते हैं। रिवर्स रेपो रेट वह दर है, जिस पर बैंकों को आरबीआई के पास जमा अपने पैसे पर ब्याज मिलता है।