भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों से पता चला है कि बैंकों में लावारिस डिपाजिट (unclaimed deposits) बढ़कर कैलेंडर वर्ष 2019 में बढ़कर 18,000 हो गया है।  साल 2018 में यह रकम 14,307 करोड़ थी।  RBI नियमों के तहत, डिपाजिट तक अनक्लेम्ड घोषित किया जाता है जब वह 10 साल यह उससे अधिक समय तक ऑपरेट नहीं किया जाता है। 

आंकड़े बताते हैं कि केवाईसी मानदंडों के बावजूद, बैंक अभी भी जमाकर्ताओं के एक हिस्से का पता लगाने में सक्षम नहीं हैं।  सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की लावारिस जमा में सबसे बड़ी हिस्सेदारी 14,971 करोड़ है, इसके बाद निजी क्षेत्र के बैंकों में यह 2,472 करोड़ और विदेशी बैंकों में 455 करोड़ हैं। 

बैंक 10 साल या उससे अधिक के लिए लावारिस जमा डिपॉजिटर्स एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड में ट्रांसफर करते हैं और अपनी वेबसाइट पर ऐसे खातों की सूची प्रदर्शित करते हैं।  2015 में RBI ने बैंकों से इन खाताधारकों का पता लगाने के लिए और अधिक प्रयास करने को कहा था।  सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि बैंकों को लावारिस जमा और निष्क्रिय खातों के खाताधारकों के ठिकाने का पता लगाने में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। 

केंद्रीय बैंक ने ऋणदाताओं को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि लावारिस जमाकर्ताओं (unclaimed depositors) की सूची में केवल खाताधारक का नाम और उसका पता शामिल है।  हालांकि, खाता संख्या, इसका प्रकार और शाखा का नाम (इकाई बैंकों के मामले में लागू नहीं) बैंक की वेबसाइट पर खुलासा नहीं किया जाएगा। 

एक रिपोर्ट के अनुसार एक बैंकर ने कहा “ऐसा नहीं है कि ग्राहक अपने खाते में बड़ी रकम भूल गया है।  यह इतनी छोटी रकम है कि उसे कोई परवाह नहीं है।  बैंकर ने ऐसे मामलों में ग्राहक एक अलग शहर या किसी अन्य देश में चला गया है। बैंक के लिए इन ग्राहकों को खोजने का प्रयास करने के लिए लावारिस जमा की तुलना में बहुत अधिक खर्च होंगे।  आंकड़ों से पता चला कि बचत खातों ने 2019 में कुल धन का 66 फीसदी बनाया। 

बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के संशोधन के बाद उस अधिनियम में धारा 26A डाला गया, जिससे RBI को जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता कोष की स्थापना करने की अनुमति मिली। फंड का उपयोग जमाकर्ताओं के हित को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है। हालांकि जमाकर्ता अभी भी बैंकों से पैसे पर दावा करने में सक्षम होगा, भले ही इसे निधि में स्थानांतरित किया गया हो और बैंक निधि से ऐसी राशि के वापसी का दावा कर सकता है।