असम की डिब्रूगढ़ लोकसभा सीट प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने-अपने कद्दावर नेताओं को मैदान में उतार दिया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) एक बार फिर रामेश्वर तेली को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने पवन सिंह घोटवार को प्रत्याशी घोषित किया है और बहुजन मुक्ति पार्टी से डॉक्टर तितुस भेंगरा चुनाव लड़ रहे हैं।भावेन बरुआ नेशनल पीपुल्स पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं। अपूर्व सैकिया, नुरुल इमादुल इस्लाम सैकिया और रुबुल बोरगेहेन चुनाव लड़ रहे हैं।


कुल मिलाकर डिब्रूगढ़ से 8 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। राजनीतिक समीकरण की बात करें तो डिब्रूगढ़ की 9 विधानसभा सीटों में से 8 पर बीजेपी और 1 असम गण परिषद के पास है।आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बीजेपी के कद्दावर नेता रामेश्वर तेली इस सीट से सांसद भी हैं। 2014 के बाद से ही पूर्वोत्तर के राज्यों में बीजेपी अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। यह सीट असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनवाल की भी रही है। 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में उन्हें बड़ी जीत मिली थी।डिब्रूगढ़ लोकसभा सीट पर 1991 से 1999 तक ये सीट फिर कांग्रेस के पास रही। यहां से पबन सिंह घटोवार लगातार चार बार चुनाव जीत कर संसद पहुंचे हैं। 2004 के चुनाव में सर्बानंद सोनोवाल ने असम गण परिषद के टिकट से चुनाव जीता था। 2009 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी पवन सिंह ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने एजीपी प्रत्याशी सर्बानंद सोनोवाल को 35143 वोटों से हराया था। डिब्रूगढ़ सीट से 53 साल के सांसद रामेश्वर तेली की संसद में उपस्थिति 91.28 फीसदी के साथ 293 दिन थी। उन्होंने संसद में 93 सवाल किए, जबकि 74 बहसों में हिस्सा लिया है। रामेश्वर तेली शायद इस बार अपना टिकट बचाए रख पाने में कामयाब रहेंगे, यह पार्टी हाईकमान के करीबी बताते हैं। असम की इस सीट पर चुनाव बेहद दिलचस्प होने वाला है क्योंकि पवन सिंह घोटवार ने इस इलाके में पिछले कुछ महीनों में जी तोड़ मेहनत की है।भले ही पवन सिंह को 1 लाख 85 हजार 347 मतों से रामेश्वर तेली ने हराया था लेकिन इस बार का राजनीतिक समीकरण बदल भी सकता है।