उत्तर प्रदेश में अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय ने निर्माणाधीन राम मंदिर को उत्तर भारत का सबसे भव्य मंदिर बताते हुए कहा कि अगले वर्ष दिसंबर में मंदिर का काम पूरा होने पर श्रीरामलला के दर्शन हो सकेंगे। 

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सुलतानपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के रक्षा बंधन उत्सव कार्यक्रम में भाग लेते हुए राय ने कहा कि उत्तर भारत में ऐसा विशाल मंदिर नहीं होगा। मंदिर में भगवान के दर्शन तो होंगे ही, साथ में लोग मंदिर की नक्काशी के काम को देखते रह जाएंगे। राय ने कहा कि सुलतानपुर अयोध्या से नजदीक है, इसलिए यहां के लोगों को अगले साल दिसंबर में श्रीराम लला के दर्शन का न्योता वह अभी से दे रहे हैं। उन्होंने मंदिर निर्माण के कार्य की प्रगति का ब्योरा देते हुए मंदिर निर्माण के तकनीकी पहलुओं की भी जानकारी दी। 

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उन्होंने बताया कि मंदिर निर्माण का कार्य बेहतर गति से आगे बढ़ रहा है। कार्य की स्थिति के अनुसार अगले वर्ष दिसंबर में मंदिर दर्शन करने योग्य हो जाएगा। अभी मंदिर की कुर्सी साढ़े छह मीटर ऊंची बनायी जा रही है। यह ऊंचाई पत्थर से बनायी जा रही है, जो दीर्घायु होती है। जमीन में लोहे का कतई इस्तेमाल नहीं किया गया है। कंक्रीट का जीवन भी निर्धारित है। कंक्रीट के ऊपर पत्थर लगाए जा रहे हैं। इसमें तकनीकी विभाजन से काम हो रहा है। राय ने कहा कि यह अतिशयोक्ति नही होगी कि जिस नक्काशी और डिजाइन से मंदिर बन रहा है, ऐसा न हो जाये कि लोग भगवान के दर्शन करने से ज्यादा नक्काशी को देखते रह जाएं। उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर का आंदोलन हिंदुस्तान के सम्मान की पुर्नस्थापना की लड़ाई का प्रतीक है। विदेशी आक्रांताओं ने जो अपमान किया था, उसके धोने का काम करना, भारत के लोगों जिम्मेदारी थी। जिसे पूरा किया गया।