अयोध्या में राममंदिर का निर्माण में बाधा आ रही है, क्योंकि मंदिर के नीचे भुरभुरी मिट्टी होने के कारण पाइलिंग यानी पिलर डालने में समस्या आ रही है। राममंदिर ट्रस्ट के सचिव चंपत राय ने कहा कि आईआईटी, इंजीनियरिंग संस्थानों और निर्माण कंपनियों के विशेषज्ञों के साथ परामर्श जारी है।

राय के अनुसार, परीक्षण में पिलरों को 125 फीट की गहराई तक ले जाया गया था और 28 दिनों के बाद उसे 700 टन वजन के साथ-साथ भूकंप के झटके देकर जांच किया गया, लेकिन परिणाम मानदंडों के अनुसार नहीं आए, जिसके चलते काम वहीं रुक गया। समस्याओं के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिमी तरफ पानी का प्रवाह है, जहां सरयू नदी से पवित्र अभयारण्य बनाया जाना है।

17 मीटर नीचे तक कोई ‘मूल मिट्टी’ नहीं है और उसके नीचे एक भुरभुरी मिट्टी पाई जा रही है, जो नींव को मजबूत पकड़ बनाने से रोकता है। राय ने कहा कि मद्रास, बॉम्बे, गुवाहाटी और सूरत के आईआईटी के विशेषज्ञों को जोड़ते हुए, सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) रुडक़ी, टाटा, लार्सन एंड टुब्रो और मंदिर के प्रोजेक्ट मैनेजर जगदीश इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि कैसे एक मजबूत आधार सुनिश्चित किया जाए और वाटर इनफ्लो मुद्दे से निपटा जाए।

उन्होंने कहा, ‘‘जमीन के नीचे पानी के संभावित प्रवाह को रोकने के लिए राम मंदिर के आसपास जमीन के नीचे एक रिटेनिंग वॉल बनाई जाएगी।’’ राय ने कहा कि मंदिर की नींव पर काम जनवरी से शुरू होगा, क्योंकि विभिन्न आईआईटी और इंजीनियरिंग संस्थानों के विशेषज्ञ एक रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।