राजस्थान की कांग्रेस राजनीति में बवंडर आ गया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच की लड़ाई अब खुलकर सामने आ गई है। पायलट ने बगावत करते हुए साफ कर दिया कि वे सोमवार की कांग्रेस विधायक दल की बैठक में शामिल नहीं होंगे। पायलट खेमे ने दावा किया है कि गहलोत सरकार अल्पमत आ गई है। पायलट ने ये भी दावा किया कि कांग्रेस के 30 विधायक और कुछ निर्दलीय विधायक उनके साथ हैं। वहीं, सीएम अशोक गहलोत खेमे की ओर से कहा गया है कि उनके पास सौ से ज्यादा विधायक हैं और गहलोत सरकार को कोई खतरा नहीं है। गहलोत ने रविवार देर रात तक पार्टी विधायकों और मंत्रियों के साथ बैठक की।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सारे हालात को देखते हुए प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे, रणदीप सुरजेवाला और अजय माकन को जयपुर भेजा है और उन्होंने रात को मुख्यमंत्री आवास पर जाकर गहलोत और अन्य नेताओं से मुलाकात की और सारी स्थितियों को लेकर विचार विमर्श किया। तीनों नेता विधायकों से बातचीत भी करेंगे। इससे पहले पायलट खेमे में रहे विधायक दानिश अबरार, रोहित बोहरा और चेतन डूडी ने प्रेस वार्ता में कहा था कि वे गहलोत के साथ है। इसके अलावा एक अन्य विधायक प्रशांत बैरवा भी रात को गहलोत के निवास पर पहुंचे और कहा कि वे गहलोत के साथ हैं। मैं पायलट का सम्मान करता हूं, लेकिन यदि वे भाजपा में गए तो वे उनके साथ नहीं जाएंगे।

सूत्रों के अनुसार सचिन पायलट सोमवार को भाजपा में शामिल हो सकते हैं। उनके भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा की मौजूदगी में पार्टी में शामिल होने के कयास लगाए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार पायलट अपने साथ तीस कांग्रेस के विधायक होने का दावा कर रहे हैं। ऐसे में यदि ऐसा है तो वे विधायक अपना इस्तीफा भी दे सकते हैं। पायलट की बगावत के पीछे कांग्रेस से भाजपा में गए ज्योतिरादित्य की भूमिका भी बताई जा रही है। पायलट ने रविवार को उनसे मुलाकात भी की बताई। वहीं सिंधिया ने एक सोशल मीडिया के जरिए संदेश में पायलट का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पायलट को दरकिनार किए जाने से मैं दुखी हूं। ये दिखाता है कि कांग्रेस में काबिलियत और क्षमता की कोई अहमियत नहीं है। माना जा रहा है कि एसओजी की ओर से जो नोटिस सीएम गहलोत, डिप्टी सीएम पायलट और कुछ अन्य नेताओं को दिया है, उससे पायलट काफी नाराज हो गए। पायलट खेमे की ओर से ये चर्चा भी आई कि डिप्टी सीएम से पूछताछ के लिए एसओजी का नोटिस उन्हें स्वीकार नहीं है।

-विधानसभा का गणित

कांग्रेस 107

भाजपा 72

रालोपा 3

माकपा 2

बीटीपी 2

राष्ट्रीय लोकदल 1

निर्दलीय 13

कुल 200