नासा की ओर से आर्टेमिस प्रोग्राम के तहत दुनिया भर से 18 अंतरिक्ष यात्रियों को चुना गया है। भारतीय अमेरिकी राजा जॉन वुर्पुतूर चारी का नाम भी इसी लिस्ट में शामिल है। ये भारत के लिए गौरव की बात है कि राजा चारी भारतीय मूल के इकलौते व्यक्ति हैं जिन्हें ये मौका दिया गया है।

साल 2017 में ऐस्ट्रनॉट कैंडिडेट क्लास के लिए राजा चारी को नासा ने चुना था. इससे पहले वो 461वें फ्लाइट टेस्ट स्क्वाड्रन के कमांडर थे। राजा चारी F-35 इंटीग्रेटेड टेस्ट फोर्स के डायरेक्टर भी रह चुके हैं।

राजा चारी साल 1999 में यूएस एयरफोर्स एकेडमी से ग्रेजुएशन किया। यहां से उन्होंने ऐस्ट्रोनॉटिकल इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर मास्टर्स डिग्री के लिए MIT गए। यहां से ऐयरोनॉटिक्स एंड ऐस्ट्रोनॉटिक्स की पढ़ाई पूरी की।

महज 43 साल के राजा चारी का पालन पोषण अमेरिका के आयोवा में हुआ है। उनके पिता श्रीनिवास चारी भारत में पैदा हुए थे। पिता श्रीनिवास ने हैदराबाद की उस्मानिया यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया था। इसके बाद वो मास्टर्स की डिग्री हासिल करने अमेरिका गए और वहीं रहने लगे।

राजा चारी की मां पैगी आयोवा का कहना है कि राजा बचपन से ही ऐस्ट्रोनॉट बनने के सपने देखते थे। उन्हें चांद पर जाने का ख्वाब बचपन से आता था। इसके लिए उन्होंने अपनी पढ़ाई लिखाई भी इसी क्षेत्र में करने का फैसला लिया था।

राजा चारी के लिए उनका पहला मोटिवेशन उनके पिता श्रीनिवास हैं। उनका कहना है कि मेरे पिता अच्छी शिक्षा हासिल करने के मकसद से अमेरिका आए थे। उन्हें इसका महत्व समझ आया। इसी का असर मेरी परवरिश पर भी पड़ा। मेरे बचपन में पूरा फोकस शिक्षा पर रहा।
भारत से रिश्ता रखने वाले तीन ऐस्ट्रोनॉट्स कल्पना चावला, सु‍नीता विलियम्स और राकेश शर्मा पहले भी स्पेस में जा चुके हैं। लेकिन इनमें से कोई चांद पर नहीं गया है। अगर राजा चारी मून मिशन के लिए जाते हैं, तो वो चांद पर कदम रखने वाले पहले भारतीय मूल के ऐस्ट्रोनॉट होंगे।