बिहार में कोरोना संक्रमण के मामलों में धीरे-धीरे गिरावट देखने को मिल रही है। हालांकि, दूसरी लहर में फ्रंटलाइन रेलवे स्टाफ खासे प्रभावित हुए हैं। पूर्व मध्य रेलवे (ईसीआर) के अधिकार क्षेत्र में अलग-अलग जगहों पर काम करने वाले डॉक्टर, अधिकारी और स्टेशन ड्यूटी स्टाफ समेत 5,331 रेलवे कर्मचारी इस महामारी से संक्रमित हुए हैं। इनमें 102 कर्मचारियों की मौत कोरोना संक्रमण से हो गई, जिनमें लोको पायलट, गार्ड और स्टेशन मास्टर शामिल हैं।

केवल रेलवे कर्मचारी ही नहीं बड़ी संख्या में उनके परिवार के सदस्यों की भी मौत कोविड के चलते हुई है। जानकारी के मुताबिक, रेलवे स्टाफ के परिवार में 114 सदस्यों की मौत हुई है। अगर कर्मियों और उनके परिवार में हुई मौत के आंकड़े को मिला दें तो कुल 227 लोगों की जान इस खतरनाक वायरस ने ले ली है।

ECR के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) राजेश कुमार ने बताया कि कोरोना संक्रमण से सबसे ज्यादा स्टेशन मास्टर, लोको पायलट और गॉर्ड प्रभावित हुए। इनमें से कई कर्मियों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। हालांकि, वे होम आइसोलेशन में तेजी से ठीक हो रहे हैं। वहीं कई कर्मियों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

सीपीआरओ के अनुसार, 'ECR के पंडित दीन दयाल उपाध्याय मंडल (डीडीयू) में सबसे अधिक 1,569 पॉजिटिव केस आए हैं, जिनमें से 51 लोगों की मौत हुई है। इनमें डिवीजन के 16 फ्रंटलाइन रेलवे कर्मचारी शामिल हैं। धनबाद मंडल में लगभग 905 रेल कर्मचारियों का कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आया है। इनमें 19 रेलवे कर्मचारियों सहित 33 लोगों की मौत हुई है।

समस्तीपुर मंडल के कुल मिलाकर 714 रेलवे कर्मचारी, जिनमें ज्यादातर लोको पायलट और गार्ड हैं, इस बार कोविड संक्रमित हुए हैं। इनमें 21 मरीजों की मौत हो गई, जिसमें मंडल के 15 रेलवे कर्मचारी शामिल थे। सोनपुर डिवीजन में, 832 रेलवे कर्मचारियों की कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, जिनमें से 22 कर्मचारियों समेत 37 लोगों ने वायरस के कारण दम तोड़ दिया है।