कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने शनिवार को पार्टी के सर्वोच्च मंच कांग्रेस कार्यसमिति (CWC meeting) की बैठक में कहा कि यदि पार्टी ने उन पर अध्यक्ष पद पुन: संभालने का दबाव बनाया तो वह यह जिम्मेदारी निभाने पर विचार कर सकते हैं। यह जानकारी पार्टी सूत्रों ने दी। 

सूत्रों के अनुसार गांधी (Rahul Gandhi) ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Chief Minister Ashok Gehlot) के कांग्रेस कार्यसमिति में उन्हें पुन: अध्यक्ष बनाने के प्रस्ताव पर सदस्यों के मौन के बीच कहा, पार्टी के नेताओं नेे मुझ पर दबाव बनाया तो मैं अध्यक्ष पद (Congress National President) संभालने पर विचार कर सकता हूं। एक सूत्र के अनुसार गांधी को पुन: पार्टी अध्यक्ष (Congress National President) बनाने के गहलोत (Chief Minister Ashok Gehlot) के प्रस्ताव पर समिति के सदस्य मौन रहे जिसे सदस्यों की स्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है। सूत्र के अनुसार कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष गांधी को पुन: पार्टी की कमान सौंपने के  गहलोत के प्रस्ताव पर बैठक में ‘समिति के किसी सदस्य ने कुछ नहीं बोला।’ 

इस सूत्र ने कहा कि इस प्रस्ताव पर कार्यसमिति के सदस्यों के ‘मौन’ को उनकी स्वीकृति के रूप में देखा गया। गौरतलब है कि पिछले लोकसभा चुनावों में पार्टी की पराजय की जिम्मेदारी लेते हुए गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। उनके इस्तीफे के बाद श्रीमती सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने कार्यवाहक अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली थी। पार्टी के कुछ नेता संगठनात्मक चुनाव जल्द कराने की मांग बार-बार उठा रहे थे। ऐसे हालात में लम्बे अंतराल के बाद आयोजित कांग्रेस कार्यसमिति की पार्टी आज की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने पार्टी में पूर्णकालिक अध्यक्ष के लिए संगठनात्मक चुनाव कराने की मांग कर रहे नेताओं को करारा जवाब देते हुए कहा है कि कांग्रेस कार्यसमिति ने 2019 में उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसमें वह सबको साथ लेकर चली हैं और पार्टी की मजबूती के लिए उन्होंने इस जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन भी किया है। 

श्रीमती गांधी (Sonia Gandhi) ने शनिवार को यहां पार्टी मुख्यालय में कांग्रेस की सर्वोच्च नीति निर्धारक संस्था कार्यसमिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि संगठन में चुनाव कराने की मांग पार्टी में चारों तरफ से हो रही है और सभी की भावना के अनुसार कांग्रेस की मजबूती के लिए संगठनात्मक चुनाव होने चाहिए, लेकिन पार्टी के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को इससे पहले एकजुट होकर पार्टी हितों को सर्वोपरि रखते हुये काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पार्टी में संगठनात्मक चुनाव कराने या अन्य मुद्दों को पार्टी के भीतर उठाया जाना चाहिए। पार्टी के आंतरिक मुद्दों को सार्वजनिक मंचों पर या मीडिया के माध्यम से नहीं उठाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि उन्होंने पूर्णकालिक अध्यक्ष के तौर पर बखूबी अपनी जिम्मेदारी निभाई है और सार्वजनिक महत्व के मुद्दों को उठाया है। उन्होंने कहा कि पार्टी नेता जो भी कहते हैं, उन्होंने उस पर ध्यान दिया है लेकिन मीडिया के माध्यम से कोई भी बात उनसे नहीं की जा सकती है।