फ्रांस से खरीदा गया बहुप्रतिक्षीत अत्याधुनिक लड़ाकू विमान राफेल गुरुवार को औपचारिक रूप से वायु सेना के लड़ाकू विमानों के बेड़े में शामिल हो गया। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ खुद फ्रांसीसी रक्षा मंत्री फरोरेंस पार्ले भी मौजूद थी। 

हरियाणा के अंबाला स्थित वायु सेना स्टेशन में एक शानदार समारोह में पांच विमान वायु सेना के गोल्डन एरो स्क्वाड्रन का हिस्सा बने। ये विमान गत 27 जुलाई को भारत आये थे। इससे पहले सर्वधर्म पूजा की गई और रफाल ने भारत के अन्य लड़ाकू विमानों के साथ अपनी ताकत और जौहर का आसमान में प्रदर्शन किया। समारोह में चीफ आफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत , वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया, रक्षा सचिव डॉ. अजय कुमार, डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. जी सतीश रेड्डी , रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों के कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। 

वहीं भारतीय वायुसेना में राफेल के शामिल होने के बाद अब चीन और पाकिस्तान दोनों की चिंताएं बढ़ गई हैं। अत्याधुनिक राफेल दोनों ही पड़ोसी देशों की वायुसेना को कड़ी टक्कर देने में सक्षम है। आज अंबाला के आसमान पर राफेल बड़ी आसानी से मैनूवर्स करते दिखाई दिए। गौरतलब है कि राफेल आ जाने से भारतीय वायुसेना की ताकत में जो इजाफा हुआ है, उससे दोनों पड़ोसी देशों की नींद उड़ चुकी है।

 राफेल को भारत की जरूरतों के हिसाब से मॉडिफाई किया गया है। राफेल की रेंज 3,700 किलोमीटर है, यह अपने साथ चार मिसाइल ले जा सकता है। राफेल की लंबाई 15.30 मीटर और ऊंचाई 5.30 मीटर है। राफेल का विंगस्‍पैन सिर्फ 10.90 मीटर है जो इसे पहाड़ी इलाकों में उडऩे के लिए आदर्श एयरक्राफ्ट बनाता है। विमान छोटा होने से उसकी मैनुवरिंग में आसानी होती है।