राफेल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अरुण शौरी आैर अन्य की याचिका पर सुनवार्इ करते हुए सरकार से दस दिनों के भीतर सील बंद लिफाफे में राफेल विमान की कीमत आैर उसके डिटेल जमा करने को कहा। बता दें कि पिछली बार सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ सौदे की प्रक्रिया की जानकरी मांगी थी। लेकिन इस बार सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ दस दिनों के भीतर राफेल की कीमत आैर उसकी विस्तृत जानकारी मांगी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार जाे भी जानकारी दे वह याचिकाकर्ता को भी दें ताकि वह इस पर जवाब दे सके। साथ ही कोर्ट ने कहा कि अगर सरकार को लगता है कि काेर्इ जानकारी गोपनीय है तो वह याचिकाकार्ता को देने से मना कर सकती है। कोर्ट ने सरकार से आॅफसेट पार्टनर को कैसे चुना गया इसकी भी जानकारी मांगी है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग की, जिस पर प्रमुख न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि अभी इसमें वक्त लग सकता है। भूषण की मांग पर टिप्पणी करते हुए गोगोई ने कहा कि पहले सीबीआई को अपने घर को व्यवस्थित कर लेने दीजिए।


पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्र सरकार ने राफ़ेल ख़रीद सौदे की निर्णय प्रक्रिया सील बंद लिफ़ाफ़े में कोर्ट में दाखिल की थी। केंद्र सरकार ने 3 सीलबंद लिफाफे में डील की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को सौंपी थी। दरअसल, पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हम राफेल की प्रक्रिया इसलिए पूछ रहे हैंं । ताकि हम खुद को संतुष्ट कर सके और केंद्र को हम नोटिस जारी नहीं कर रहे हैं, बल्कि प्रक्रिया का विवरण मांग रहे हैं।


राफेल समझौते के विवरण सील बंद लिफाफे में अदालत को सौंपने की मांग संबंधी जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कर रहा था। इस याचिका में राफेल सौदे पर रोक लगाने की मांग की गई है। CJI जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ के समक्ष नईयाचिका अधिवक्ता विनीत धांडे ने दायर की थी। इस याचिका में कहा गया था कि सौदे को लेकर आलोचना का स्तर निम्नतम हो गया है और देश के प्रधानमंत्री की आलोचना करने के लिए विपक्षी पार्टियां अपमानजनक और अभद्र तरीके अपना रही हैं। 


मामले में अदालत से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा गया था कि आलोचनाओं को विराम देने के लिए भारत सरकार और दासौ एविएशन के बीच हुए समझौते की जानकारी कम से कम अदालत को तो दी ही जानी चाहिए। इस तरह अदालत उस सौदे की सावधानी से जांच कर सकती है। इससे पहले अधिवक्ता एमएल शर्मा ने जनहित याचिका दाखिल कर राफेल सौदे पर रोक लगाने की मांग की थी।