गुवाहाटी चाय नीलामी केंद्र ने दावा किया कि उसने 1.2 किलोग्राम पर्पल (बैंगनी) चाय की 24,501 रुपए प्रति किलोग्राम की रिकॉर्ड कीमत पर बिक्री की है। चाय उद्योग के सूत्रों ने कहा कि पर्पल चाय का उत्पादन अरुणाचल प्रदेश के डोनियो पोलो टी एस्टेट द्वारा किया जाता है जिसकी यहां डुगर कंज्यूमर प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को बिक्री की गर्इ।

पहली बार किया जा रहा हैं देश में पर्पल टी का उत्पादन

गुवाहाटी चाय नीलामी खरीदार एसोसिएशन के सचिव दिनेश बिहानी ने समाचार एजेंसियों को बताया, "पहली बार भारत में बैंगनी चाय का उत्पादन किया जा रहा है। चाय की उच्चतम कीमत पर बिक्री कन्टेम्पररी टी ब्रोकर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा की गयी।" गुवाहाटी चाय नीलामी केंद्र, जिसने हाल ही में अपने स्टॉक में पर्पल टी को शामिल किया है, ने गोल्ड टिप, सिल्वर नीडल्स और अन्य विशेषता वाले चाय जैसे विभन्नि प्रकार के चायों की बिक्री करता है।


चाय बनाने के लिए 10,000 पर्पल टी पत्‍तोंकी जरूरत

सूत्रों ने बताया कि एक किलो पर्पल चाय बनाने के लिए लगभग 10,000 पर्पल टी पत्‍तों की जरूरत होती है। डोनियो पोलो ने इसी साल अगस्‍त में गोल्‍डन नीडल्‍स चाय की 1.1 किलोग्राम मात्रा को 40,000 रुपए प्रति किलोग्राम की दर पर बेचा था।

खतरे में चाय बागान का अस्तित्व
वहीं चाय उत्पादन में दुनिया में दूसरे नंबर पर आने वाले भारत में कई चाय बागानों के अस्तित्व पर खतरा भी मंडरा रहा है। चाय बोर्ड के अनुसार, भारत में जितने में भी चाय बागान हैं, उसमें से 18 प्रतिशत की स्थिति बहुत ही दयनीय है। देश के 16 राज्यों में चाय के बागान हैं। असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में देश का 95 प्रतिशत हिस्सा पैदा होता है।

चाय उत्पादन के लिए देश का सबसे बड़ा राज्य है असम
चाय बोर्ड के अनुसार पश्चिम बंगाल की दार्जिलिंग चाय दुनिया की सबसे महंगी और खुशबूदार चाय मानी जाती है, यहां पर लगभाग 86 बागान हैं, जहा चाय तैयार की जाती है। चाय उत्पादन में असम देश का सबसे बड़ा राज्य है। तमिलनाडु का नीलगिरि पहाड़ भी चाय उत्पादन के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। केरल का मुन्नार हिल स्टेशन में भी एक ऐसी जगह हैं, जहां बड़ी मात्रा में चाय बागान हैं। हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा चाय भी देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान रखता है, लेकिन इसका अस्तित्व भी अब खतरे है।