चीन को भारत से दुश्मनी करना महंगी पड़ती जा रही है क्योंकि अब उसके हाथ से हॉन्ग कॉन्ग निकलने जा रहा है। इसी के साथ लद्दाख में भारत को घेरने में जुटे चीन को हॉन्ग कॉन्ग में तगड़ा झटका लगा है। दरअसल चीनी सरकार ने हॉन्ग-कॉन्ग के लिए नैशनल सिक्योरिटी कानून को संसद में पेश किया है। जिसके खिलाफ हॉन्ग कॉन्ग में सड़कों पर लाखों लोग उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं। चीन समर्थित पुलिस लोकतंत्र की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों का सख्ती के साथ दमन कर रही है।
चीन की दादागिरी केवल हॉन्ग कॉन्ग और ताइवान में ही नहीं, बल्कि भारत के साथ लगे हुए लद्दाख सीमा पर भी जारी है। ताजा सैन्य झड़पों के बाद चीन ने बड़ी संख्या में सैनिकों को लद्दाख से लगी सीमा के नजदीक तैनात किया है। इतना ही नहीं, चीनी सेना भारतीय सड़क निर्माण को रोकने की भी प्लानिंग कर रही है।
शिन्हुआ ने कहा है कि चीनी संसद सत्र से पहले एक बैठक में 'नैशनल सिक्यॉरिटी की रक्षा के लिए हॉन्ग-कॉन्ग में विशेष प्रशासनिक क्षेत्र में कानून व्यवस्था को स्थापित करने और बेहतर करने और तंत्र को लागू करने के लिए' बिल पर समीक्षा को अजेंडा में शामिल किया गया। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक इस कानून के तहत विदेशी हस्तक्षेप, आतंकवाद और राष्ट्रदोही गतिविधयों पर प्रतिबंध होगा जिनसे सरकार को गिराने की कोशिश की जा रही हो।
बताया गया है कि इस विधेयक से पेइचिंग हॉन्ग-कॉन्ग की राजनीतिक उठापटक को अपने हाथ में लेने की कोशिश कर रहा है। बता दें कि हॉन्ग-कॉन्ग ब्रिटिश शासन से चीन के हाथ 1997 में 'एक देश, दो व्यवस्था' के तहत आया और उसे खुद के भी कुछ अधिकार मिले हैं। इसमें अलग न्यायपालिका और नागरिकों के लिए आजादी के अधिकार शामिल हैं। यह व्यवस्था 2047 तक के लिए है।