एक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर को 3 साल की कानूनी लड़ाई के बाद 3 करोड़ रुपए से भी ज्‍यादा बतौर मुआवजा देने के लिए राजी हो गई है। क्योंकि यहां पर एक स्‍टूडेंट प्रोफेसर द्वारा सर कहने पर भड़क गया था। दरअसल, फिलॉसफी के प्रोफेसर को एक स्‍टूडेंट ने अपने पसंदीदा सर्वनाम से बुलाने के लिए कहा था।

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ये मामला 2018 में सामने आया था जब प्रोफेसर ने स्‍टूडेंट को क्‍लास के बीच में 'यस सर' कहा था। इसके बाद जब क्‍लास खत्‍म हुई तो स्‍टूडेंट ने प्रोफेसर से कहा था वह खुद की पहचान महिला के तौर पर रखता है। ऐसे में उसको महिला के तौर पर जाना जाये, और उन्‍हीं सर्वनामों से संबोधित किया जाए, जोकि महिलाओं के लिए पुकारे जाते हैं।

मेरीवेदर से स्‍टूडेंट ने ये भी कहा था कि उन्‍हें केवल उनके पहले या अंतिम नाम से बुलाया जाए। फिर बाद में स्‍टूडेंट ने इस मामले की शिकायत यूनिवर्सिटी से कर दी थी। इसके बाद इस मामले की जांच हुई। जिसमें ये सामने आया कि मेरीवेदर ने यूनिवर्सिटी में छात्रों के लिए प्रतिकूल माहौल बना दिया है। फिर इस मामले में यूनिवर्सिटी की ओर से प्रोफेसर को चेतावनी दी गई थी।

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इसके बाद यह मामला डिस्ट्रिक्‍ट कोर्ट पहुंच गया। कोर्ट ने अब इस केस को रद्द कर दिया है। हालांकि, अब इस मामले में यूनिवर्सिटी ने माना है कि ये मेरीवेदर की मर्जी पर निर्भर है कि वह स्‍टूडेंट को संबोधित करते हुए किस नाम, पदनाम, या सर्वनाम का उपयोग करते हैं। साथ ही यूनिवर्सिटी ने ये बात भी मानी कि कभी भी पसंदीदा सर्वनाम से पुकारे जाने के लिए दबाव नहीं डाला था।