यूक्रेन पर रूस के हमले अभी भी लगातार जारी हैं। रूसी हमलों की वजह से कीव, खारकीव, मारियुपोल और बूचा समेत कई शहर तबाह हो चुके हैं। इस युद्ध में अब तक हजारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। अब यूक्रेन के डोनेट्स्क में रूसी सेना का समर्थन कर रहे ग्रुप ने बड़ी चेतावनी दी है। डोनेट्स्क पीपुल्स मिलिशिया (डीपीआर) के आधिकारिक प्रतिनिधि एडुआर्ड अलेक्जेंड्रोविच बसुरिन ने कहा है कि अगर यूक्रेन ने रूस की मांगों को नहीं माना तो हालात भारत-पाकिस्तान, भारत-चीन सीमा की तरह हो जाएंगे।

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बसुरिन ने कहा कि हर कोई यह बात जानता है कि यूक्रेन में पश्चिमी ताकतों द्वारा रूसी संघ को नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। वो लोग नहीं रुकने वाले नहीं हैं, उनका अगला टारगेट भारत होगा। प्रवक्ता ने कहा कि सारी दुनिया जानती है कि भारत-पाकिस्तान, भारत-चीन सीमा दो ऐसे क्षेत्र हैं, जिसका सामाधान वर्षों से नहीं निकल पाया है।

उन्होंने कहा कि मारियुपोल में रूसी संघ ने सुरक्षित मानवीय गलियारे के बदले बंदरगाह शहर के लोगों से हथियार डालने की बात कही है। साथ ही साथ इस क्षेत्र में हम विसैन्यीकरण और विमुद्रीकरण को भी लागू करना चाहते हैं, अगर मारियुपोल में यह मांगें पूरी नहीं होती है तो स्थिति भारत-चीन, भारत-पाकिस्तान सीमा जैसी होगी।

उन्होंने कहा कि भारत में भी क्षेत्रीय, भाषा, आस्था जैसी ही समस्याएं हैं। सब कुछ जो यूक्रेन में आधारशिला था, भारत में वही है। यही कारण है कि मैं समझता हूं कि भारत इस समय यूक्रेन के घटनाक्रम को क्यों देख रहा है। बसुरिन ने कहा कि अगर इस वक्त रूस-यूक्रेन के बीच जो कुछ भी हो रहा है उसमें भारत को रूस का साथ देना चाहिए। भारत से समर्थन की अपील करते हुए उन्होंने कहा, 'अगर आपकी आबादी का पांच प्रतिशत हमारी मदद करेगी तो हम जीतेंगे और इस जंग को खत्म किया जा सकता है।

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उन्होंने कहा, मैं भारत से आंख मूंदकर हमारी मदद करने के लिए नहीं कह रहा। आप कई तरह से मदद कर सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में तटस्थता का रुख भी मददगार है।' उन्होंने यह भी कहा कि हमारी धरोहर अब इतिहास बन रही है। हम बदकिस्मत हैं, क्योंकि यह सबकुछ हमारी जमीन पर हो रहा है। उन्होंने कहा कि हमें रिकवरी के बारे में सोचने की जरूरत है। लेकिन रिकवरी से पहले इस जंग को कैसे को जीता जा सके इस पर जोर देना है। क्योंकि रिकवरी कल के लिए है और जीत आज की है।