मध्यप्रदेश के जबलपुर स्थित मुखर्जी अस्पताल में कोरोना संक्रमित की मौत के बाद लाश को सिर्फ  इसलिए बंधक बना लिया गया क्योंकि प्रबंधन को ढाई लाख रुपए चाहिए थे. 9 घंटे तक लाश को बंधक बनाए जाने की खबर मिलते ही राजनैतिक दल के कार्यकर्ता पहुंच गए, जिनके हंगामे के बाद लाश को सौंपा गया, इसी तरह मेडिकल अस्पताल में कोरोना संक्रमित महिला की मौत के बाद उसके जेवर चोरी कर लिए गए.

 बताया गया है कि विजय नगर निवासी 62 वर्षीय व्यक्ति को कोरोना संक्रमित होने के कारण मुखर्जी अस्पताल में भरती कराया गया, जिनके इलाज में परिजनों ने काफी रुपया खर्च किया, इसके बाद भी उनकी उपचार के दौरान मौत हो गई. 

सुबह सात बजे के लगभग मौत होने के बाद परिजनों को खबर मिली, जिसपर वे पहुंच गए, अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों को ढाई लाख रुपए का बिल थमा दिया, 9 घंटे तक शव को अस्पताल प्रबंधन ने बंधक बनाए रखे, इस बात की जानकारी मिलते ही राजनैतिक दलों के कार्यकर्ता भी पहुंच गए, जिन्होने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया, काफी देर तक हंगामा होता रहा, इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों को शव सौंपा, गौरतलब है कि सरकार ने कोरोना की जांच से लेकर इलाज तक के लिए रेट निर्धारित किए है, इसके बाद भी निजी अस्पतालों की मनमानी आज भी जारी है, सारे नियमों को ताक पर रखकर पीडि़तों से रुपया वसूला जा रहा है.

मेडिकल अस्पताल में महिला की मौत के बाद ही जेवर चोरी-

इसी तरह मेडिकल अस्पताल में कोरोना संक्रमित महिला की मौत के बाद ही उनके शरीर से सोने के जेवर उतार लिए गए, महिला के जेवर न मिलने पर परिजनों ने आरोप लगाते हुए हंगामा किया.

इतने इंजेक्शन आने के बाद भी मारामारी, कालाबाजारी-

जबलपुर के मेडिकल, विक्टोरिया से लेकर निजी अस्पतालों तक में रेमडेसिविर इंजेक्शन की आपूर्ति की गई है, इसके बाद भी इंजेक्शन को लेकर मारामारी दिखाई दे रही है, अभी भी इंजेक्शनकी कालाबाजारी की जा रही है, मेडिकल, विक्टोरिया से लेकर निजी अस्पताल प्रबंधन रेमडेसिविर इंजेक्शन को बाहर से खरीदकर लाने के लिए पर्ची दे रहे है, जिला प्रशासन इन सारी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में नाकाम ही साबित हो रहा है.