सरसपुर मंदिर के पुजारी महंत लक्ष्मणदासजी महाराज ने शनिवार को कहा कि अगर इस साल ‘रथ यात्रा’ नहीं हुई तो यह अशुभ होगा। उन्होंने पहले भी यात्रा में देरी होने पर आत्महत्या करने की धमकी दी थी। महंत लक्ष्मणदासजी महाराज ने कहा, पूरा साधु-संत समुदाय इस मुद्दे पर फैसला करेगा और जरूरत पडऩे पर आंदोलन का सहारा लेगा।

महंत ने कहा, मुझे लगता है कि सरकार इस साल यात्रा की अनुमति देगी क्योंकि सिनेमा हॉल, मल्टीप्लेक्स, मॉल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति थी, तो ‘रथ यात्रा’ क्यों नहीं? पिछले साल महंत ने गुजरात सरकार को धमकी दी थी कि अगर ‘रथ यात्रा’ की अनुमति नहीं दी गई तो वह दो दिनों के भीतर आत्महत्या कर लेंगे। इस बीच 144वें जुलूस की तैयारियां जोरों पर हैं। जुलूस में इस्तेमाल होने वाले लकड़ी के रथ की मरम्मत और रंग-रोगन का काम शुरू हो गया है। जुलूस की अनिश्चितता के कारण पिछले वर्षों की तुलना में काम देर से शुरू हुआ है। 

हर साल जुलूस ‘जल यात्रा’ समारोह के ठीक बाद शुरू होता है। इस साल यह देर से शुरू हुआ लेकिन रथ को फिर से रंगने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि 2020 में कोविड -19 महामारी के कारण जुलूस नहीं निकला था। जुलूस से जुड़े एक कार्यकर्ता ने कहा, इसलिए केवल थोड़ा सा लकड़ी के पहियों में तेल लगाने और कुछ पेंटवर्क करने की जरूरत है। अपने 143 साल पुराने इतिहास के दौरान, भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा अपने वर्तमान स्थान, जमालपुर में जगन्नाथ मंदिर, अहमदाबाद के पुराने शहर के अधिकांश हिस्सों से गुजरते हुए अपने मातृ सरसपुर मंदिर के लिए एक बड़े जुलूस के साथ आयोजित की गई है।