युद्ध से परेशान और नकदी की तंगी से जूझ रहे देश में अफगान लोग आगामी (Afgani) सर्दियों के मौसम (winter season) से निपटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यहां अधिकांश लोग गरीबी रेखा के नीचे रहते हैं और वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण बुनियादी दैनिक जरूरतों को मुश्किल से पूरा कर पाने की स्थिति में हैं। लकड़ी के खरीदार यार मोहम्मद ने बताया, 'बिजली की खरीद दिन-ब-दिन कम होती जा रही है और लोग सर्दी से निपटने और ठंड के मौसम में अपने घरों को गर्म रखने के लिए लकड़ी या अन्य जरूरी चीजें खरीदने का जोखिम नहीं उठा सकते हैं।'

मोहम्मद ने कहा कि दैनिक जरूरतों की आसमान छूती कीमतों ने आम लोगों को परेशान कर दिया है। सीमाओं को बंद करने और विदेशों में अफगान संपत्ति को फ्रीज करने से अफगानों के लिए आर्थिक समस्याएं पैदा हुई हैं। मोहम्मद ने गुस्से में कहा, ''सीमाएं बंद हैं, बैंकों में सामान्य गतिविधियां नहीं हो रही है और विदेशों में अफगानिस्तान (Afganistan) की संपत्तियां जब्त कर ली गई हैं।'

अगस्त के मध्य में तालिबान (Taliban) के अफगानिस्तान (Afganistan ) पर कब्जा करने के बाद से अमेरिका (US) ने कथित तौर पर 10 बिलियन डॉलर से अधिक की संपत्ति फ्र्रीज कर दी है, जिसके कारण एक अनिश्चित स्थिति पैदा हो गई है जहां बैंक खाता मालिकों ने अपनी पूंजी निकालना शुरू कर दिया है और स्थानीय बैंक प्रत्येक सप्ताह 200 डॉलर से अधिक नहीं दे सकते हैं। उच्च मुद्रास्फीति दर, बढ़ती बेरोजगारी और बढ़ती गरीबी के साथ देश की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है।

अफगानिस्तान (Afganistan) में अधिकांश लोगों के पास अपने घरों में एक सेंट्रल हीटिंग सिस्टम नहीं है और पहाड़ी देश में घर को गर्म रखने के लिए बड़े पैमाने पर पुराने जमाने के हीटिंग सिस्टम, लकड़ी के चूल्हे पर निर्भर हैं। एक कोयला विक्रेता मोहम्मद साबिर ने कहा, ''व्यवसाय ठप हो गया है, बेरोजगार लोगों की संख्या बढ़ रही है और आर्थिक स्थिति बेहद अस्थिर है, जबकि पेट्रोल और डीजल सहित ईंधन की कीमतें दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं।''

पिछले साल इसी समय साबिर के मुताबिक उनकी दुकान कोयला खरीदारों से भरी हुई थी। लेकिन आजकल, स्थानीय लोग शायद ही कभी कोयले की मांग करते हैं, हालांकि कीमत बहुत अधिक नहीं है। साबिर ने कहा, ''पिछले साल एक टन कोयले की कीमत 10,000 अफगानी थी, लेकिन इस साल इसकी कीमत 11,000 अफगानी है। लोगों की बिजली की खरीद पिछले साल की तुलना में इस साल कम हो गई है।''