सिक्किम उत्तर पूर्व के राज्यों में गोवध पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने वाला पहला राज्य बन गया है। यहां गोवध को संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखा गया है। 29 अगस्त को राज्य के सत्तारूढ़ दल सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट(एसडीएम)जो कि भाजपा के उत्तर पूर्व लोकतांत्रिक अलायंस(एनईडीए) का हिस्सा है, ने इससे संबंधित एक बिल विधानसभा में पारित कर दिया।

बिल में गाय व बछड़े की हत्या पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। असम में गोवध पर आंशिक रूप से प्रतिबंध है। राज्य में यह संज्ञेय अपराध की श्रेणी में नहीं आता है। ऐसे मामलों में किसी की गिरफ्तारी या उसे जेल नहीं भेजा जा सकता है। असम में बूढ़े और कमजोर हो चुके गोवंश का वध एक प्रमाण पत्र लेकर किया जा सकता है। सिक्किम में पारित अधिनियम में गाय की हत्या पर गिरफ्तार करने और जेल भेजने का प्रावधान है।

बीते 28 अगस्त को राज्य के पशुपालन मंत्री सोमनाथ पोडयाल ने सिक्किम गोवध प्रतिबंध अधिनियम 2017 को विधानसभा में पेश किया था। 29 अगस्त को अधिनियम पर बहस के दौरान मुख्यमंत्री पवन चामलिंग ने कहा, हालांकि इस संबंध में एक कानून है लेकिन नया अधिनियम गो हत्या को पूरी तरह प्रतिबंधित करता है। उन्होंने कहा कि राज्य में ऑर्गेनिक खेती के लिए गाय की रक्षा करना जरूरी हो गया है। इस अधिनियम के
तहत गाय को दुधारू पशु के रूप में परिभाषित किया गया है और इनके खिलाफ अपराध को संज्ञेय और गैर जमानती माना गया है।

राज्य में अगर किसी को गोवध करते हुए पाया गया तो उस कम से कम दो साल की सजा का प्रावधान किया गया है,इसे पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है। साथ ही कम से कम 10 हजार रुपए के जुर्मान का प्रावधान किया गया है। इस कृत्य को बार बार दोहराने वाले को पांच साल के सश्रम कारावास की सजा है। इसे बढ़ाकर सात साल और कम से कम 1 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान किया गया है। उत्तर पूर्व के अरुणाचल प्रदेश,नागालैंड, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम में गोवध पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।