चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने एक बड़ा सस्पेंस खत्म कर दिया है. उन्होंने साफ़ कर दिया है कि वह अभी कोई राजनीतिक पार्टी नहीं बनाने जा रहे हैं. लेकिन उन्होंने घोषणा की है कि वह बिहार में एक नई सरकार के निर्माण के लिए पूरा जोर लगाएंगे.  

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साथ ही प्रशांत किशोर ने बताया है कि वह बिहार में राजनीतिक बदलाव के लिए 3 हजार किलोमीटर की पदयात्रा करेंगे. उन्होंने बताया कि पदयात्रा चंपारण से शुरू होगी. प्रशांत किशोर ने अधिक से अधिक लोगों से मिलने के लिए 3 अक्टूबर से 3,000 किमी पदयात्रा की घोषणा की है. 

- चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कहा कि वह बिहार के लोगों के लिए काम करेंगे. 

- किशोर ने नई पार्टी का ऐलान नहीं किया. 

- उन्होंने 2 अक्टूबर से बिहार में 3000 किलोमीटर की पदयात्रा का ऐलान किया है. 

प्रशांत किशोर ने कहा कि निकट भविष्य में बिहार में कोई चुनाव नहीं हैं, इसलिए एक राजनीतिक दल अभी उनकी योजना का हिस्सा नहीं है. उन्होंने कहा, "मैं अगले तीन-चार साल लोगों तक पहुंचने में लगाऊंगा."

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प्रशांत किशोर ने कहा कि लालू और नीतीश कुमार के 30 साल के शासन के बाद भी बिहार पिछड़ा राज्य है. अगर बिहार को आगे बढ़ाना है तो सबको आगे आना होगा.

अपने मिशन बिहार की घोषणा करते हुए रणनीतिकार ने लालू यादव और नीतीश कुमार दोनों के शासन की आलोचना करते हुए राज्य के मुख्य दलों के साथ किसी भी गठबंधन के बारे में अटकलों को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, "पिछले 15 साल", बिहार के लिए अच्छे नहीं रहे. उन्होंने कहा, "मैं आज किसी राजनीतिक मंच या राजनीतिक दल की घोषणा नहीं करने जा रहा हूं. मैं उन सभी को एक साथ लाने का इरादा रखता हूं जो बिहार में बदलाव चाहते हैं."

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उन्होंने कहा कि उनकी टीम ने पिछले कुछ महीनों में 17,000 लोगों की पहचान की है जो सुशासन में विश्वास करते हैं. उन्होंने कहा, "इनमें से करीब 90 फीसदी लोगों का मानना है कि बिहार को नई सोच की जरूरत है. अगले तीन-चार महीनों में मैं व्यक्तिगत तौर पर ज्यादा से ज्यादा लोगों से मिलने की कोशिश करूंगा." 

प्रशांत किशोर ने एक बार फिर इस बात पर सफाई दी कि उनकी कांग्रेस के साथ बातचीत बंद क्यों हो गई. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने उनकी योजना पर काम करने के लिए पूरी गंभीरता दिखाई और यहां तक कि इसे पूरा करने के रास्ते पर भी सहमति जताई. किशोर ने कहा कि लेकिन वे चाहते थे कि मैं एम्पावर्ड एक्शन ग्रुप में शामिल हो जाऊं, जिसका कांग्रेस के संविधान में कोई दर्जा नहीं था.

प्रशांत किशोर ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ काम करने पर कहा, "नीतीश कुमार के साथ मेरी कोई व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है. हमारे बहुत अच्छे संबंध हैं. लेकिन व्यक्तिगत संबंध एक बात है और एक साथ काम करना और सहमत होना अलग है. अगर नीतीश कुमार मुझे बैठक के लिए बुलाते हैं, तो मुझे जाना होगा. लेकिन ऐसा नहीं है इसका मतलब है कि हम हर चीज पर सहमत हैं और एक साथ काम करेंगे."