भारतीय पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी प्रमोद भगत ने यहां शनिवार को टोक्यो पैरालंपिक में पुरुष एकल एसएल3 वर्ग के रोमांचक फाइनल में ग्रेट ब्रिटेन के डेनियल बेथेल को लगातार गेमों में 21-14, 21-17 से हराकर ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता, जबकि मनोज सरकार ने प्ले-ऑफ मैच में जापान के डाइसुके फुजीहारा को 22-20, 21-13 से हराकर कांस्य पदक हासिल किया। 

विश्व चैंपियन प्रमोद की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि बैडमिंटन को पहली बार पैरालंपिक खेलों में शामिल किया गया है और प्रमोद भगत इस खेल में स्वर्ण पदक जीतने वाले दुनिया और भारत के पहले बैडमिंटन खिलाड़ी बने हैं। दुनिया के नंबर एक पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी प्रमोद ने टोक्यो के योयोगी नेशनल स्टेडियम में 45 मिनट तक चले फाइनल मैच में काफी संयम दिखाया और ग्रेट ब्रिटेन के बेथेल को 21-14, 21-17 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। 

उल्लेखनीय है कि 33 वर्षीय भगत मिश्रित युगल एसएल3-एसयू5 वर्ग में भी कांस्य पदक की दौड़ में है, जहां वह अपनी साथी पलक कोहली के साथ रविवार को प्ले ऑफ में डाइसुके फुजिहारा और अकीको सुगिनो की जापानी जोड़ी से भिड़ेंगे। बैडमिंटन खिलाड़यिों के आज स्वर्ण और कांस्य पदक जीतने के साथ मौजूदा टोक्यो पैरालंपिक 2020 में भारत के कुल पदकों की संख्या 17 हो गई है। उसके पास अब चार स्वर्ण, सात रजत और छह कांस्य पदक हैं। इस बीच भारतीय पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी और गौतम बुद्ध नगर के डीएम सुहास एलवाई ने टोक्यो पैरालम्पिक-2020 में इतिहास रच दिया है। सुहास ने पुरुषों के एलएस 4 वर्ग के एकल में इंडोनेशिया के सेतिवान फ्रेडी को लगातार गेमों में 21-19 , 21-15 से मात देकर फाइनल में प्रवेश कर लिया है। वह देश के पहले ऐसे अधिकारी हैं, जिन्होंने पैरालम्पिक में मेडल पक्का कर लिया है।