त्रिपुरा के महाराज बीर बिक्रम किशोर माणिक्य के पर्सनल गार्ड को 100 वर्ष की उम्र के आंकड़े का छू लिया है। इस पर उन्हें तत्कालिन राजकुमार ने खुश होकर नकद ईनाम दिया है। गयाराम देबबर्मा नाम के इस बुजुर्ग गार्ड को यह इनाम राजा के वंशज प्रद्योत किशोर देब बर्मन के द्वारा दिया गया। उनको ईनाम के तौर पर राजवंश की ओर से 2000 रूपए नकद दिए गए।

1938 में दी थी सेवाएं

गयाराम देबबर्मा ने पर्सनल गार्ड के तौर पर महाराज बीर बिक्रम किशोर माणिक्य को अपने सेवाएं सन 1938 में दी थी। हालांकि उन्होंने अपनी सेवाएं कुछ ही महीनों के लिए दी थी। इसके बावजूद राजवंश की ओर से उन्हें खुश होकर यह ईनामी राशि उनको उम्र का शतक लगाने पर दी गई। गयाराम द्वारा अपनी नौकरी छोड़ने का कारण राजमहल से उनके गांव और घर की दूरी था।

जिम्मेदारी से दी सेवा

गयाराम का कहना है कि उन्होंने अपने सेवाकाल में महाराज की खूब सेवा की जिसकी एवज में उनको राजशाही खाना, रहना और अन्य सुविधाएं मिली थीं। इसके अलावा उन्होंने राजकुमार की शादी में शिरकत की थी। गांव गयाराम के कॉटेज को राजबाड़ी के नाम से जाना जाता है। इस घर में वो दो बेटों और उनके परिवार के साथ रहते हैं।