देश के 9 मुस्लिम संगठनों ने बड़ा ऐलान किया है जिसके तहत वो चीन में बनी पोर्क जिलेटिन वाली वैक्सीन का इस्तेमाल नहीं करेंगे। इस पर एक फतवा जारी किया गया है। खबर है कि कुछ वैक्सीन में पोर्क जिलेटिन यानी सूअर की चर्बी का इस्तेमाल किया गया है। इस्लाम में पोर्क से बने किसी भी उत्पाद को हराम है।

हाल ही में UAE के शीर्ष इस्लामी संगठन फतवा काउंसिल ने कोरोना वायरस की वैक्सीन में पोर्क जिलेटिन होने पर भी इसे जायज बताया था। वहीं, देवबंद दारुल उलूम के मीडिया प्रभारी अशरफ उस्मानी ने बताया कि वैक्सीन को लेकर अभी तक कोई भी ऑफिशियल स्टेटमेंट संस्थान की तरफ से जारी नही किया गया है। उन्होंने बताया कि दारुल उलूम में अभी छुट्टियां चल रही हैं।

कई कंपनियों ने पोर्क-फ्री यानी सुअर के जिलेटिन का इस्तेमाल किए बिना वैक्सीन विकसित करने का दावा किया है। फाइजर, मॉडर्ना और एस्ट्राजेनेका ने बाकायदा नोटिस जारी कर बताया है कि उनकी वैक्सीन में पोर्क जिलेटिन का उपयोग नहीं किया गया है। इन कंपनियों ने कहा है कि वैक्सीन का इस्तेमाल हर कोई कर सकता है।

दरअसल, इस तरह की चर्चा अक्टूबर में ही शुरू हो गई थी। जब इंडोनेशियन राजनयिक और इस्लामिक धर्मगुरु कोरोना वैक्सीन पर चर्चा करने के लिए चीन पहुंचे थे। यह ग्रुप इंडोनेशिया की जनता के लिए वैक्सीन की डील फाइनल करने के इरादे से पहुंचा था। यहां वैक्सीन तैयार करने के तरीकों की जानकारी मिलने के बाद धर्मगुरुओं ने इस पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए।

कई कंपनियों ने पोर्क-फ्री यानी सुअर के जिलेटिन का इस्तेमाल किए बिना वैक्सीन विकसित करने का दावा किया है। फाइजर, मॉडर्ना और एस्ट्राजेनेका ने बाकायदा नोटिस जारी कर बताया है कि उनकी वैक्सीन में पोर्क जिलेटिन का उपयोग नहीं किया गया है। इन कंपनियों ने कहा है कि वैक्सीन का इस्तेमाल हर कोई कर सकता है।