कोरोना की रोकथाम के लिए कोवैक्सीन विकसित करने वाली कंपनी भारत बायोटेक के चेयरमैन और मैनेजिंग डाइरेक्टर डा.कृष्णा इल्ला ने इसे 200 फीसद सुरक्षित बताया है। उन्होंने कहा कि अब तक हुए परीक्षणों में इस वैक्सीन के दस फीसद से भी कम दुष्प्रभाव के मामले सामने आए हैं। 

उल्लेखनीय है सरकार की मंजूरी मिलने के बाद विपक्षी नेताओं और विशेषज्ञों ने कोवैक्सीन की कारगरता और सुरक्षित होने को लेकर सवाल उठाए थे। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने वैक्सीन को लेकर सवाल खड़ा किया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि कोवैक्सीन को समय से पहले मंजूरी दे दी गई है और यह खतरनाक हो सकता है। वहीं कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए स्वास्थ्य मंत्री से स्पष्टीकरण मांगा था।

 मामला तूल पकड़ने पर भारत बायोटेक ने सोमवार को अपना पक्ष मजबूती से रखा। कंपनी के चेयरमैन और एमडी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये कहा कि कोवैक्सीन के दुष्प्रभाव 10 फीसद से भी कम हैं। जबकि अन्य वैक्सीन में 60 से 70 फीसद तक दुष्प्रभाव देखने को मिला है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि यह वैक्सीन 200 फीसद सुरक्षित है। डा.इल्ला की यह टिप्पणी कोवैक्सीन को रविवार को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल आफ इंडिया (डीजीसीआइ) की मंजूरी मिलने के अगले दिन आई है।

भारत बायोटेक ने यह वैक्सीन आइसीएमआर और नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वायरोलाजी (एनआइवी) के सहयोग से विकसित की है। तीसरे चरण का परीक्षण पूरा होने से पहले कोवैक्सीन को मंजूरी मिलने के आरोप पर डा.इल्ला ने कहा कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) का कहना है कि यदि आपकी प्लेटफार्म टेक्नोलाजी पुष्ट है, सुरक्षित है और संतोषजनक प्रीक्लिनिकल डाटा उपलब्ध है तो आपके उत्पाद को आपात लाइसेंस मिल सकता है। उन्होंने कोवैक्सीन को बैकअप बताए जाने पर कहा कि यह वैक्सीन है, कोई बैकअप नहीं। जिम्मेदार लोगों को सोच समझ कर टिप्पणी करना चाहिए।

कृष्णा इल्ला ने कहा है कि कुछ लोगों द्वारा वैक्सीन का राजनीतिकरण किया जा रहा है, मैं यह स्पष्ट रूप से बताना चाहता हूं कि मेरे परिवार का कोई भी सदस्य किसी भी राजनीतिक दल से नहीं जुड़ा है। कृष्णा इल्ला ने कहा कि हम भारत में सिर्फ क्लीनिकल टेस्ट नहीं कर रहे हैं। हमने ब्रिटेन सहित 12 से अधिक देशों में क्लीनिकल टेस्ट किए हैं। हम पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और अन्य देशों में क्लीनिकल टेस्ट कर रहे हैं। हम सिर्फ एक भारतीय कंपनी नहीं हैं, हम वास्तव में एक वैश्विक कंपनी हैं। उन्होंने कहा कि हम टीकों में अनुभव के बिना वाली कंपनी नहीं हैं। हमारे पास टीकों का जबरदस्त अनुभव है। हम 123 देशों के लिए काम कर रहे  हैं। हम एकमात्र कंपनी हैं, जिन्हें समीक्षा पत्रिकाओं में इतना व्यापक अनुभव और व्यापक प्रकाशन मिला है। 

उन्होंने कहा कि अभी हमने दो करोड़ डोज बनाए हैं। हमारा लक्ष्य 70 करोड़ डोज तैयार करने का है। अभी हम कुछ समस्याओं का सामना कर रहे हैं लेकिन हम जल्द से जल्द वैक्सीन बाजार में ले आयेंगे। भारत बायोटेक के दावे से पूर्व वायरोलाजिस्ट शाहिद जमील ने कहा कि, 'मुझे नहीं लगता कि यह वैक्सीन सुरक्षित साबित होगी या यह 70 फीसद से अधिक कारगर होगी।' उन्होंने कहा कि मेरी चिंता वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों के बयानों को लेकर भी है। वैक्सीन को मंजूरी देने के लिए डाटा की उपलब्धता जरूरी है। 

उन्होंने कहा, 'कोवैक्सीन को बैकअप क्यों कहा जा रहा है। इसका मतलब तो यही है कि जरूरत पड़ने पर ही इसका इस्तेमाल किया जा सकता है जिसकी कारगरता अभी साबित नहीं हो पाई है।' आल इंडिया ड्रग्स एक्शन नेटवर्क (एआइडीएएन) ने कहा कि जिस वैक्सीन की कारगरता साबित नहीं हो सकी है उसके नए स्ट्रेन से निपटने में सक्षम होने की बात किस वैज्ञानिक आधार पर कही जा रही है।