त्रिपुरा में सभी राजनितिक पार्टियां ने चुनाव प्रचार के लिए कमर कस ली है और दोनों मुख्य विपक्षी पार्टियोंं सीपीएम तथा कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर वादा नहीं निभाने, गरीब विरोधी कदम और बड़े व्यापरियों की सहायता का आरोप लगाया है। त्रिपुरा में दो चरणों में चुनाव का सभी राजनितिक पार्टियों ने स्वागत किया है और सभी दल अपने उम्मीदवारों की सूची को जल्द घोषित करेंगे।


सत्तारूढ़ इंडिजेनस पीपुल्स फ्रंट आफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) तथा इंडिजेनस नेशनल पार्टी ऑफ त्रिपुरा (आईएनपीटी)ने हालांकि अभी तक कोई चुनावी रणनीति नहीं बनाई है। निर्धारित चुनाव कार्यक्रम के अनुसार पहले चरण में 11 अप्रैल को पश्चिमी त्रिपुरा की सामान्य सीट पर और पूर्वी त्रिपुरा आदिवासी आरक्षित सीटों पर 18 अप्रैल को मतदान होगा। इस दौरान विपक्षी पार्टियों ने भाजपा पर राज्य में लोकतंत्र का माहौल नहीं बनाने का आरोप लगाया और चुनाव केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के नियंत्रण में कराने की मांग की।


भाजपा ने हालांकि दावा किया वह जनादेश जानने और चुनाव लडऩे के लिए पूरी तरह तैयार है। अभी तक कुल 25.98 लाख मतदाता पंजीकृत हैं। वाम दल के अध्यक्ष बिजन धर ने कहा कि शंकर प्रसाद दत्ता पश्चिमी त्रिपुरा से चुनाव लड़ेंगे और जितेंद्र चौधरी पूर्वी त्रिपुरा से चुनाव लड़ेंगे। त्रिपुरा कांग्रेस उपाध्यक्ष तापस देय ने भी भाजपा पर राज्य में लोकतांत्रिक माहौल बिगाडऩे के आरोप लगाए।


उन्होंने कहा कि चुनाव की तैयारी लगभग पूरी हो गयी है और अगले हफ्ते तक उम्मीदवार घोषित कर दिए जाएंगे। भाजपा ने विपक्ष के सभी आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि जितना काम मोदी सरकार ने पिछले पांच वर्षों में किया है उसका आधा भी कांग्रेस ने 70 सालों तक नहीं किया।


भाजपा प्रवक्ता नबेंदु भट्टाचार्जी ने कहा, 'हम न केवल दोनों सीटों पर, बल्कि प्रत्येक मतदान केंद्र पर अपनी सफलता के बारे में भी आश्वस्त हैं, क्योंकि लोगों ने बीजेपी-आईपीएफटी सरकार के काम के कारण यहां पिछले एक साल में बदलाव देखा है। लोग कांग्रेस-सीपीएम पर उनके पिछले कारनामों की वजह से विश्वास नहीं करते हैं।'