त्रिपुरा में कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति को देखते हुये पूर्वी त्रिपुरा लोकसभा सीट के लिए 18 अप्रैल की जगह 23 अप्रैल को मतदान कराने के चुनाव आयोग के फैसले पर सभी राजनीतिक दलों ने खुशी जतायी है।


राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दावा किया है कि चुनाव के दौरान सांप्रदायिक आधार पर शांति भंग करने की कांग्रेस और माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की साजिश के परिणामस्वरूप यह फैसला लिया गया है।


वहीं विपक्षी पार्टी कांग्रेस का दावा है कि वह चुनाव आयोग को 11 अप्रैल को पश्चिमी त्रिपुरा में मतदान के दौरान बड़े स्तर पर हुई धांधली के बारे में समझाने में सक्षम रही जबकि माकपा ने कहा है कि शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए उसके द्वारा चुनाव आयोग पर बनाये गये दबाव के कारण यह फैसला लिया गया है।


भाजपा प्रवक्ता नवेन्दु भट्टाचार्य ने बुधवार सुबह संवाददाता सम्मेलन में चुनाव आयोग के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि प्रदेश भाजपा की एक टीम चुनाव आयोग से मिली थी और पूर्वी त्रिपुरा निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस और माकपा द्वारा सांप्रदायिक अशांति फैलाने के संभावित प्रयास की आशंका जतायी थी।


भट्टाचार्य ने कहा, 'प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रद्योत किशोर देववर्मन ने एक जनसभा में भाजपा का समर्थन करने का नतीजा चुनाव के बाद भुगतने की धमकी दी थी। माकपा के राज्य सचिव गौतम दास ने लोगों को मताधिकार का दावा करने के लिए हथियार का इस्तेमाल करने को उकसाया था।'


उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव करने के लिए 18 अप्रैल की जगह 23 अप्रैल को मतदान कराने का फैसला किया है।