मेघालय में इस बार भी किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। मेघालय का गठन 1972 में हुआ था। तब ऑल पार्टी हिल लीडर्स कांफ्रेंस को पूर्ण बहुमत मिला था। उसे 32 सीटें मिली थी। बहुमत से एक ज्यादा।  1972 में कांग्रेस को 9 सीटें मिली थी जबकि 19 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार जीते थे।

6 साल बाद ऑल पार्टी हिल लीडर्स कांफ्रेंस का कांग्रेस में विलय हो गया था। 1972 के बाद मेघालय में जितने भी चुनाव हुए हैं,उनमें किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। 2013 के विधानसभा चुनाव में भी किसी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था। आपको बता दें कि मेघालय में विधानसभा की कुल 60 सीटें हैं। पूर्ण बहुमत के लिए 31 सीटें चाहिए। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 29 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। उसने 13 निर्दलीय और एनसीपी के 2 विधायकों के समर्थन से मुकुल संगमा के नेतृत्व में गठबंधन की सरकार बना ली।

1978 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सबसे ज्यादा 20 सीटें मिली। एएचएल को 16, एचपीडी को 14 सीटें मिली थी। 10 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी। अगले विधानसभा चुनाव 1983 में हुए। इसमें भी किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। हालांकि कांग्रेस 25 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। 1983 में एएचएल को 15, एचपीडी को 15, पीडीसी को 2 सीटें मिली थी। 3 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार जीते थे। 1988 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। उसे 22 सीटें मिली। एचपीडी को 6, पीडीसी को 2, एचपीयू को 19, एएचएल(ए)2 सीटें मिली। 9 सीटों पर निर्दलीय जीते थे।

अगले विधानसभा चुनाव 1993 में हुए। इस चुनाव में भी कांग्रेस 24 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। 1993 में एचपीयू को 11, एएचएलसीएएम को 3, एचपीएसडी को 8,पीडीआई को 2 और एमपीपी को 2 सीटें मिली। 10 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी।1998 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस 25 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। यूडीपी को 20, एचपीडीपी, भाजपा पीडीएम को 3-3, जीएनसी को 1 सीट मिली थी। 5 सीटों पर निर्दलीय जीते थे। अगले विधानसभा चुनाव 2003 में हुए। इस चुनाव में भी कांग्रेस को सबसे ज्यादा सीटें मिली। कांग्रेस 22 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। एनसीपी को 14, यूडीपी को 9, एमडीपी को 4, केएचएनएएम, एचपीडीपी और भाजपा को 2-2 सीटें मिली। 5 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी।

2008 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। उसे 25 सीटें मिली। एनसीपी को 15, यूडीपी को 11, एचएसपीडीपी को 2, केएचएनएएम और भाजपा को 1-1 सीट मिली। 5 सीटों पर निर्दलीय जीते। 2013 के विधानसभा चुनाव में भी किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिली। हालांकि कांग्रेस 29 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। यूडीपी को 8, एचएसपीडीपी को 4, एनसीपी और एनपीपी को 2-2, एनईएसडीपी को 1 सीट मिली। 13 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार जीते।