लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। जिसके चलते हर राजनीतिक पार्टियों में खलबली मची हुई है। इसी तरह से कई नेताओं में पार्टी को लेकर नाराजगी और बगावत के दौर भी साथ चल रहे हैं। इस बीच बीजेपी सांसद रामप्रसाद शर्मा के चौबीस घंटे के भीतर पूरी तरह पलटी मारने के बाद एक बार फिर से तेजपुर से पूर्व नौकरशाह एमजीवीके भानु की कांग्रेस से दावेदारी मजबूत हो गई है।

भानू का नाम एक तरह से तय होने के बावजूद हाईकमान अंतिम समय तक सारे समीकरण जांच लेना चाहता है। नेपाली समुदाय के मतों की बहुलता वाले इस क्षेत्र में कांग्रेस राज्य से बाहर से एक व्यक्ति पर दांव लगाने से पहले पूरी माप-तौल में लगी है। कयास लगाए जा रहे थे कि वे तेजपुर से कांग्रेस प्रत्याशी हो सकते हैं।


ये सारा जोड़-गुणा अभी परवान चढ़ा नहीं था कि रामप्रसाद ने पलटी मार दी, और ऐलान किया कि वे राज्य भाजपा नेतृत्व से खफा हैं, केंद्रीय नेतृत्व से नहीं। फिर वो वकालत का पेशा शुरू कर देंगे, लेकिन आजीवन आरएसएस के ही होकर रहेंगे। किसी अन्य पार्टी से चुनाव नहीं लड़ेंगे।

राजनीति जानकारों का मानना है कि मीडिया में उनकी खुली बगावत के बाद संघ और भाजपा  केंद्रीय नेतृत्व से उन्हें कोई माकूल संदेश मिला है। इसी कारण उन्होंने कदम पीछे खींचने में देरी नहीं की। वैसे भी भाजपा ने अभी असम से अपने प्रत्याशियों पर आधिकारिक मुहर नहीं लगाई। वित्त मंत्री हिमंत विश्व शर्मा भी वहां से चुनाव लड़ेंगे या नहीं, पार्टी नेतृत्व ने सार्वजनिक नहीं किया।