नलबाड़ी के 85 वर्षीय एक वृद्ध जो एक समय पुलिस अधिकारी हुआ करते थे। अपने तीन पुत्रों को पढ़ा-लिखाकर बड़ा आदमी बनाया। बड़े बेटे को काॅटन काॅलेज और गौहाटी विश्वविद्यालय में पढ़ाया। बाद में बड़े बेटे को प्राध्यापक की नौकरी मिली। वर्तमान हाउली के बीएच काॅलेज के अर्थनीति विज्ञान विभाग के मुख्य अध्यापक शैलेन काकती अब अपने बीमार पिता को थोड़ा भी तवज्जों नहीं देते। अपने ही परिवार में व्यस्त बड़ा बेटा अपना सामाजिक दायित्व भूल चुका है।


पूर्व पुलिस आधिकारी अपनी पेंशन की राशि से पत्नी, छोटे बेटे, बहु और नाती-पोतों के साथ रह रहे थे। लेकिन वे हाल के दिनों में छोटें बेटे के अत्याचार से तंग आ गए थे। इधर पत्नी को पेंशन का आधा पैसा नहीं देने पर वह भी इस वृद्ध पर अत्याचार करती थी। अंत में तंग आकर पुलिस अधिकारी दिलीप काकती ने अपने घर से निकल जाने का फैसले लिया। कई दिनों तक मारा-मारा घूमने के बाद किसी ने उन्हें शांतिनिवास के निदेशक पत्रकार मगजुबीर रहमान को इसकी सूचना दी।
पत्रकार रहमान ने कैठालकुची स्टेशन के पास से इस वृद्ध को बरामद कर उनके चिकित्सा की व्यवस्था की तथा नलबाड़ी स्थित अपने शांतिनिवास अनाथाश्रम में रहने की व्यवस्था की। पत्रकार रहमान ने घटना के बारे में नलबाड़ी पुलिस को भी जानकारी दी। इस वृद्ध के मझले पुत्र ने भी अपने पिता को कोई महत्व नहीं दिया। छोटे पुत्र के साथ रहने के दौरान उसने वृद्ध की संपत्ति को भी अपने नाम करवा लिया। इसके बाद उसका पिता पर अत्याचार शुरू हो गया। अपने ही घर में अकेलापन का शिकार होने के बाद इस वृद्ध ने अपना घर छोड़ने का निर्णय लिया।