प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रगति मैदान में दो दिवसीय 'भारत ड्रोन महोत्सव 2022' का उद्घाटन किया। ड्रोन तकनीक को लेकर भारत में जो उत्साह देखने को मिल रहा है, वह अद्भुत है। जो ऊर्जा नजर आ रही है, वह भारत में ड्रोन सर्विस और ड्रोन आधारित इंडस्ट्री की लंबी छलांग का प्रतिबिंब है। यह भारत में रोजगार के एक उभरते हुए बड़े सेक्टर की संभावनाएं दिखाती हैं।

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पीएम मोदी ने कहा, पहले की सरकारों के समय तकनीक को समस्या का हिस्सा समझा गया, उसको गरीब विरोधी साबित करने की कोशिशें हुईं। इस कारण 2014 से पहले गवर्नेंस में टेक्नॉलॉजी के उपयोग को लेकर उदासीनता का वातावरण रहा। इसका सबसे अधिक नुकसान गरीब, वंचितों, मिडिल क्लास को हुआ। इसी क्रम में प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड स्थित केदारनाथ धाम के पुनर्विकास परियोजनाओं को लेकर दिलचस्प किस्सा सुनाया। मोदी ने बताया कि कैसे वो कैसे प्रधानमंत्री आवास में बैठे-बैठे ही केदरनाथ में चल रहे कामकाज पर नजर रख रहे थे। 

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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, जब केदारनाथ का पुनर्निर्माण का काम शुरू हुआ तो मेरे लिए हर बार वहां जाना संभव नहीं था। ऐसे में मैं ऑफिस से ही लगातार रिव्यू मीटिंग करता था। उसी में केदारनाथ में कैसे काम चल रहा है, कितनी तेजी से चल रहा हैं, मैं वहां से ड्रोन के द्वारा लगातार मॉनिटर करता था। पीएम ने कहा कि आज सरकारी कामों की क्वॉलिटी को भी देखना है और मैं बता दूं कि इन्सपेक्शन के लिए जाना है तो मेरे पहुंचने से पहले वहां सबकुछ ठीक-ठाक हो ही जाएगा। लेकिन अब उन्हें पता भी नहीं चलता है और ड्रोन के जरिए मैं सब देख लेता हूं। उन्होंने कहा, जरूरी नहीं है कि मैं पहले से बता दूं कि मुझे वहां निरीक्षण के लिए जाना है। फिर तो सबकुछ ठीकठाक हो ही जाएगा। मैं ड्रोन भेज दूं तो पता वही लेकर आ जाता है। उनको पता भी नहीं चलता कि मैंने जानकारी ले ली है।