रूस और यूक्रेन के युद्ध दुनिया को हैरान कर रखा है। दो हफ्तों के बाद भी युद्ध बंद होने के नाम नहीं ले रहा है। 4 बार की वार्ता के बाद भी दोनों देशों के बीच शांति वार्त नाकामयाब रही। इसी बीच भारत दोनों देशों के बीच युद्ध शांत करने में अहम भूमिका निभा रहा है। इस कड़ी में जापान जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा आज भारत की राजधानी नई दिल्ली पहुंच चुके हैं।


14वें भारत-जापान शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और अपने समकक्ष पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच शाम पांच बजे दिल्ली के हैदराबाद हाउस में मुलाकात होगी। मुलाकात के दौरान यूक्रेन संकट, चीन और निवेश समेत कई मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इस दौरान दोनों देश आर्थिक सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा करने के साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर भी बातचीत कर सकते हैं।


पीएम फुमियो किशिदा ने ट्वीट कर कहा कि " भारत और कंबोडिया की यात्रा।
यूक्रेन पर रूस का आक्रमण एक ऐसा आक्रोश है जो एशिया सहित अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के आदेश की नींव को हिला देता है, और यथास्थिति में इस तरह के एकतरफा बदलाव को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में कभी भी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इस यात्रा में, हम विचारों का आदान-प्रदान करेंगे और यूक्रेन की स्थिति पर काम करेंगे "।


इसके अलावा जापान के सागर में रूसी वायु सेना के साथ संयुक्त हवाई अभ्यास और सुलु सागर में फिलीपींस के क्षेत्राधिकार वाले समुद्र में युद्धपोत भेजने पर भी बात होगी। किशिदा अगले दिन यानी 20 मार्च को कंबोडिया के लिए रवाना हो जाएंगे।
गौरतलब है कि इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच साल 2019 में होने वाली मुलाकात असम में नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शनों के कारण स्थगित हो गया था। किशिदा की यात्रा उसी कार्यक्रम का हिस्सा है।
रूस को लेकर भारत और जापान का रुख अलग-अलग
बता दें कि जहां जापान ने रूस के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंधों की घोषणा की है वहीं भारत किसी का पक्ष लेने से बच रहा है। संयुक्त राष्ट्र में भी भारत ने रूस के खिलाफ मतदान नहीं किया था।