बिहार में सत्तारूढ़ और विपक्ष के 10 प्रमुख राजनीतिक दलों ने दलगत भावना से ऊपर उठकर पूरे देश में जातीय आधार पर जनगणना कराने की मांग को लेकर आज यहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की और दावा किया कि उनकी बातों को प्रधानमंत्री ने ध्यान से सुना। 

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राज्य सरकार में शामिल भारतीय जनता पार्टी एवं विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के नेतृत्व में 10 राजनीतिक दलों के नेताओं ने यहां साउथ ब्लॉक में प्रधानमंत्री कार्यालय में मोदी से मुलाकात की और दावा किया कि प्रधानमंत्री ने उनकी मांगों से इन्कार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में फैसला प्रधानमंत्री को करना है। कुमार ने कहा कि वर्ष 1931 में जातिगत आधार पर राज्य में जनगणना कराई गयी थी, ये आंकड़े काफी पुराने हो गये हैं। समाज के गरीब तबकों को उचित सुविधाएं दिलाने के लिए और योजनाओं के सही क्रियान्वयन के वास्ते न केवल बिहार बल्कि पूरे देश में जातीय आधार पर जनगणना कराने की जरूरत है। 

प्रतिनिधि मंडल में कुमार और यादव के अलावा मंत्री विजय कुमार चौधरी, भाजपा के नेता जनक राम, कांग्रेस नेता अजित शर्मा, हिन्दुस्तानी आवामी मोर्चा के जीतन राम मांझी, माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के विधायक अजय कुमार, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता सूरजकांत पासवान, वीआईपी पार्टी के नेता मुकेश सहनी, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अख्तरुल इमाम शामिल थे। कुमार ने कहा कि जातिगत जनगणना को लेकर प्रधानमंत्री को पूरी बात बता दी गई है। उन्होंने कहा कि इस जनगणना से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों के संदर्भ में सही स्थिति की जानकारी मिल जाए तो उचित निर्णय लिया जा सकेगा। 

उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा में 2020 और 2021 में जातिगत जनगणना को लेकर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था। उन्होंने कहा कि बीच में एक मंत्री ने जातिगत जनगणना को लेकर एक बयान दिया था इसके नेताओं में बैचेनी शुरू हो गई। बाद में प्रधानमंत्री से मिलने को लेकर एक पत्र भेजा गया और उन्हें इसकी अनुमति मिल गई।  यादव ने कहा कि जातिगत आधार पर जनगणना कराई जाती है तो यह राष्ट्र हित में और ऐतिहासिक होगा। इससे गरीबों को लाभ होगा तथा विकास और कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने में मदद मिलेगी। लगभग 11 प्रतिशत बड़े किसानों के पास 90 प्रतिशत जमीन है जबकि 10 फीसदी जमीन छोटे किसानों के पास है। 

उन्होंने कहा कि मंडल कमीशन के पहले देश में लोगों को जातियों के बारे में जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि जब जानवर और पेड़ पौधों की गणना की जाती है तो इंसानों की क्यों नहीं होनी चाहिए। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की जनगणना होती रही है। उन्होंने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्गों की सूची बनाने का अधिकार अब राज्य सरकारों को दिया गया है यह अच्छी बात है। विपक्ष के नेता ने कहा कि जातिगत जनगणना कराये जाने से उन्माद नहीं होगा क्योंकि धार्मिक आधार पर पहले भी ऐसा कराया जाता रहा है। उन्होंने कहा इस पर कोई अतिरिक्त राशि भी नहीं खर्च की जायेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना है और वह उनके निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।