कोरोना वायरस से लॉकडाउन पर नरेंद्र मोदी मन की बात कार्यक्रम को संबोधित किया। मन की बात में मोदी ने सबसे पहले कोरोना लॉकडाउन की वजह से लोगों को हो रही परेशानियों के लिए माफी मांगी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि देशवासियों को बचाने के लिए यह जरूरी यह था और बस यही एकमात्र तरीका था। कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई जीवन और मृत्यु के बीच की लड़ाई है। कलयुग की ये जंग इंसानों को जीतनी है।

मन की बात में मोदी-

 न आत्मार्थ्मनअपी कामानर्थम्अतभूत दयां प्रति।

वर्तते यत्चिकित्सायां स सवर्म इति वर्रतते।।

इसका मतलब कि धन और किसी खास कामना को लेकर नहीं, बल्कि मरीज की सेवा के लिए , दया भाव रखकर कार्य करता है, वो सर्वश्रेष्ठ चिकित्सक होता है।  मोदी ने कहा कि इस लड़ाई के अनेखों योद्धा ऐसे हैं जो घरों में नहीं, घरों के बाहर रहकर कोरोना वायरस का मुकाबला कर रहे हैं। जो हमारे फ्रंट लाइन सोल्जर्स हैं। 

पीएम मोदी ने कहा कि लॉकडाउन का कोई कानून नहीं तोड़ना चाहता, नियम नहीं तोड़ा चाहता, लेकिन कुछ लोग ऐसा कर रहे हैं क्योंकि अब भी वो स्थिति की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं। ऐसे लोगों को यही कहूंगा कि लॉकडाउन का नियम तोड़ेंगे तो कोरोना वायरस से बचना मुश्किल हो जाएगा, इससे देश के साथ साथ पूरी दुनिया को भी भुगतना पड़ेगा।