BRICS Summit मेें LAC पर तनाव के बीच PM मोदी और शी जिनपिंग मुलाकात हो सकती है। इस समय गलवान में भारत और चीन के बीच संघर्ष की स्थिति है। ऐसे माहौल में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच अगले महीने मुलाकात होने जा रही है। कोरोना काल के चलते यह मुलाकात वर्चुअल ही होगी। सूत्रों के अनुसार दोनों देशों के नेता 17 नवंबर को ब्रिक्स समिट के दौरान बातचीत कर सकते हैं। चीन के राष्ट्रपति कहते रहे हैं कि उनका देश क्षेत्र में युद्ध नहीं चाहता है, पर बॉर्डर के करीब बड़ी संख्या में सैन्य और हथियारों का जमावड़ा कर चीन ने अपनी मंशा जाहिर कर दी है। इसके जवाब में भारत ने भी मुंहतोड़ जवाब देने के लिए सीमा पर बड़ी तैनाती कर रखी है।
इसके तुरंत बाद 20-21 नवंबर को जी-20 समिट में भी दोनों देशाें के प्रमुख आमने-सामने होंगे जिसका आयोजन सऊदी अरब कर रहा है। यह भी वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से ही होगी। इसके ठीक बाद एक और मुलाकात एससीओ समिट में दोनों देशों के प्रमुख आमने-सामने आ सकते हैं। हालांकि इसके भी वर्चुअल तरीके से ही होने की संभावना है।

उधर, विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार यह अलग-अलग देशों का संगठन है और ऐसे समिट में दो पक्षीय बातचीत होने की उम्मीद कम है। लेकिन दोनों देशों के प्रमुखों के एक कार्यक्रम में रहने से एक बड़ा संदेश जा सकता है और पीएम मोदी इशारों में ही मंच से चीन को संदेश दे सकते हैं। पीएम मोदी अब तक कूटनीतिक स्तर पर चीन को सख्त संदेश देते रहे हैं और तमाम मंचों से उसकी विस्तारवादी नीतियों पर आक्रामक प्रहार करते रहे हैं। इससे पहले दोनों देशों में तनाव के बीच रक्षा मंत्री और विदेश मंत्रियों की मुलाकातें हो चुकी हैं।
सूत्रों के अनुसार भारत और चीन के बीच उच्चस्तरीय कूटनीतिक स्तर पर एक और बातचीत हो सकती है। जुलाई में तनाव के बाद एनएसए अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच बातचीत हुई थी। उस बातचीत में तनाव को कम करने के लिए सहमति बनी थी जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव में कमी जरूर आई लेकिन विवाद बना रहा है।
सूत्रों के अनुसार दोनों देश सर्दी शुरू होने से पहले इस स्तर की बातचीत का एक रास्ता तलाश रहे हैं। अब तक कमांडर स्तर की बातचीत या दूसरे कूटनीतिक स्तर की बातचीत में कोई हल नहीं निकल सका है। सूत्रों के अनुसार 12 अक्टूबर को दोनों देशों की तय वार्ता के बाद इसकी संभावना तलाशी जाएगी। अगर मौजूदा हालात नहीं सुधरे तो सर्दियों में एलएसी पर दोनों देशों के सेनाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।