केन्द्र सरकार ने कहा है प्लाज्मा थेरेपी को लेकर अभी तक विश्व के अनेक देशों में शोध हो रहा है और अभी तक यह पुष्टि नहीं हुई कि यह कोई ‘प्रूवन थेरेपी’ है तथा इस पर देश में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) भी अनुसंधान कर रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल मंगलवार को यहां संवाददाताओं से कहा,‘‘ कोरोना संक्रमितों के उपचार में इस थेरेपी पर काफी चर्चा हो रही है और विश्व के अनेक देशों में इस पर शोध जारी है तथा कहीं भी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि यह कोरोना के लिए एक ‘प्रूवन थेरेपी’ है। देश में भी इसका उपचार प्रायोगिक चरण में है और आईसीएमआर की तरफ से भी शोध किए जा रहे हैं और जब तक उनकी तरफ से इसकी पुष्टि नहीं हो जाती है तब तक यह प्रोयोगिक तौर पर ही होती रहेगी। 

उन्होंने कहा कि इस थेरेपी को लेकर आईसीएमआर ने कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं और उनके आधार पर ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया की मंजूरी से इसका उपयोग किया जा सकता है लेकिन अभी यह दावा करने के पर्याप्त तौर पर कोई सबूत नहीं हैं कि इसका इस्तेमाल कोविड-19 के इलाज के तौर पर किया जा सकता है। इस थेरेपी का इस्तेमाल अगर गाइडलाइन के मुताबिक नहीं किया गया तो मरीज के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता है। अग्रवाल ने स्पष्ट करते हुए कहा, ‘‘ जब तक आईसीएमआर इसकी प्रामाणिक तौर पर पुष्टि नहीं करता है तब तक इसका प्रायोगिक तौर पर ही इस्तेमाल हो सकता है लेकिन उपचार के तौर पर बिल्कुल भी नहीं होगा और बिना मंजूरी लिए यह अवैध होगा।’’ 

उन्होंने बताया कि सोमवार से अब तक कोरोना संक्रमण के 1543 नये मामले आने के बाद साथ देश में संक्रमितों की संख्या बढकऱ 29,435 हो गई है। देश में कोरेाना के सक्रिय मामलों की संख्या 21632 है और पिछले 24 घंटों में कोरोना के 684 मरीजों के ठीक हुए हैं तथा 6,868 मरीज अब तक ठीक हो चुके हैं और इनकी रिकवरी दर 23.3 फीसदी है। अग्रवाल ने बताया कि देश में अभी तक केन्द्र और राज्य सरकारों ने कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने में जो सक्रिय कदम उठाए हैं, वे बहुत ही कारगर और प्रभावी साबित हो रहे हैं और इस बात की पुष्टि इन आंकड़ों से हो जाती है कि कोरोना वायरस का प्रकोप विश्व के 20 विकसित देशों में अधिकतर देखने को मिला है। इन 20 देशों की जनसंख्या हमारी जनसंख्या के बराबर है लेकिन कोरोना से निपटने से हम उनसे कहीं बेहतर हैं। 

अग्रवाल ने बताया कि डब्ल्यूएचओ के कल के आंकड़ों को भी देखा जाए तो साफ पता चलता है कि उनके यहां पाये जाने वाले मामले हमारे देश से 84 गुना अधिक हैं और उनके यहां होने वाली मौतों की संख्या हमारे देश में हुई मौतों से 200 गुना अधिक है। यह सब केन्द्र सरकार की ‘प्रिएम्पटिव, ग्रेडेड, प्रोएक्टिव’ रणनीति के तहत संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि देश में 17 जिले ऐसे हैं, जहां पहले कोरोना वायरस के मामले आए थे, वहां पिछले 28 दिनों से कोई भी मामला नहीं आया है और इन जिलों में दो जिलों की बढ़ोतरी हुई है जिनमें पश्चिम बंगाल का केलिम्पांग और केरल का वायनाड जिला है लेेकिन एक जिला ऐसा है जिसमें कोरोना का मामला देखने को मिला है और वह बिहार का लखीसराय है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना वायरस के हल्के और मामूली लक्षणों वाले मरीजों के लिए क्वारंटीन संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए हैं लेकिन इसके बारें मे कईं शर्तों को पूरा करना होगा और ये दिशानिर्देश मंत्रालय की वेबसाइट पर दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि आज सबसे अच्छी बात यह है कि देश में लॉकडाउन से पहले केसों के दुगुना होने की दर जो पहले 3़ 2 दिन थी लेकिन अब यह बढकऱ 10 दिनों से अधिक है। 

गृह मंत्रालय की प्रवक्ता पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने बताया कि कोरोना वायरस के बारे में विभिन्न राज्यों की जानकारी हासिल करने के लिए केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने अंतर मंत्रालयी केन्द्रीय टीमोंं का गठन किया था और ये टीमें अनेक जिलों में जाकर मौका मुआयना कर रही हैं। ऐसी ही दो टीमें जो गुजरात और अहमदाबाद गईं थी जिनकी रिपोर्ट को उन्होंने साझा किया है। प्रवक्ता ने बताया कि जो टीम सूरत गई थी वहां उसने सरकारी तथा निजी अस्पतालों का दौरा किया और पाया कि प्रशासन आधुनिक तकनीक की पहचान कर मामलों की ट्रेकिंग कर रहा है। टीम ने नगर निगम के नियंत्रण कक्ष की कार्यप्रणााली को देखा और स्थानीय प्रशासन को अधिक से लोगों के टेस्ट करने और पुलिस को लॉकडाउन के नियमों का सख्ती से पालन कराने को सुनिश्चित कराने को कहा। इस दौरान पुलिस विभाग ने सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों के जरिए की गई निगरानी के बारे में बताया। टीम ने सूरत में प्रवासी मजदूरों के शिविरों में जाकर हालात का जायजा लिया और वहां भोजन वितरण प्रणाली के बारे में जानकारी ली तथा यह सुझाव दिया कि श्रमिकों को उन्हीं की भाषा में जानकारी प्रदान की जाए। उन्होंने अहमदाबाद गई टीम के बारे में बताया कि इस टीम ने राजमार्गों पर चेक प्वाइंट को देखा और सिविल अस्पतालों तथा अन्य सुविधा केन्द्रों का दौरा किया तथा वहां उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकरी ली। इसके अलावा अस्पताल में चिकित्सकों को कोरेाना मरीजों के घर घर सर्वेक्षण, सविलांस के बारे में जोर दिया।