पिछले कुछ सालों से फिक्स्ड डिपॉजिट (FDs) पर ब्याज दरें घटाने के बाद, कुछ बैंकों और नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFCs) ने अब ब्याज दरों को बढ़ाना शुरू किया है. कुछ बैंकों द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बावजूद, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मुख्य दरों पर यथास्थिति को बरकरार रखा है. पिछले दो हफ्तों में, HDFC बैंक, HDFC और बजाज फाइनेंस ने अपनी एफडी पर ब्याज दरों को बढ़ाया है.

आरबीआई के ऐलान के बाद, बैंक अभी ब्याज दरों में बढ़ोतरी को रोक सकते हैं. मई 2020 के बाद, रेपो रेट में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है. 4 फीसदी की दर पर रेपो रेट अप्रैल 2001 के बाद सबसे कम है. कम दरों की वजह से, एफडी पर मिलने वाली ब्याज दरें कई सालों के अपने सबसे निचले स्तर पर मौजूद हैं.

अब सवाल उठता है कि एफडी के निवेशकों को अपना रिटर्न बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए. आइए इस बारे में जानते हैं.

यह देखा गया है कि जब भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी करना शुरू होता है, छोटी से मध्य एफडी की दरों को पहले बढ़ाया जाता है. एक हफ्ते पहले, HDFC बैंक ने इन अवधि के लिए ब्याज दरें बढ़ाई थीं- 7 से 29 दिन, 30 से 90 दिन, 91 दिन से 6 महीने, 6 महीने 1 दिन से एक साल से कम की अवधि.

जब आप अपनी मौजूदा एफडी को रिन्यू करते हैं या नए एफडी में निवेश करें, तो छोटी अवधि की एफडी में निवेश करना बेहतर रहेगा. छोटी अवधि की एफडी को चुनकर, आप लंबे समय के लिए अपना पैसा लगाने से बचे रहेंगे और जब भी ब्याज दर में बढ़ोतरी होती है, तो आप उसका फायदा उठा सकते हैं.

अगर आप मौजूदा समय में, लंबी अवधि की एफडी में अपना निवेश करते हैं और बाद में मैच्योरिटी से पहले एफडी को तोड़कर ज्यादा ब्याज दर पर उसे दोबारा निवेश कर देते हैं, तो जुर्माना लगाया जा सकता है.

वर्तमान में, एफडी पर ब्याज दरें सबसे कम हैं. अपने रिटर्न को बढ़ाने के लिए निवेशक एक बड़ी एफडी को अलग-अलग अवधि की छोटी एफडी में तोड़ सकते हैं.

उदाहरण के लिए, अगर आपके पास 5 लाख रुपये की मौजूदा एफडी है, तो आप इसे 5 भागों में बांट सकते हैं और 1 लाख रुपये की पांच एफडी कर सकते हैं. इनकी अवधि अलग-अलग रखें (1 साल, 2 साल, 3 साल, 4 साल और 5 साल). एक साल के बाद, जब वह मैच्योर होती है, तो उसे 5 साल के लिए रिन्यू कर दें. 2 साल वाली को भी रिन्यू कर दें. इससे यह सुनिश्चित होगा कि आपकी सभी डिपॉजिट समान समय पर सबसे कम ब्याज दर वाली नहीं होंगी. और औसत रिटर्न ज्यादा रहेगा.

निवेशकों के पास फ्लोटिंग रेट एफडी में निवेश करने का भी विकल्प मौजूद होता है. इससे वे लंबी अवधि के लिए फंड को लॉक करने से बच सकते हैं. फ्लोटिंग रेट एफडी के तहत, जमा पर ब्याज दरें बेंचमार्क से लिंक्ड होती हैं और ब्याज दरें उसी के मुताबिक रहती हैं. इसलिए, एक बार जब कुल ब्याज दर बदलती है और दरों में बढ़ोतरी होती है, तो जमाकर्ताओं को इनका फायदा मिलता है, क्योंकि एफडी पर ब्याज दरों में भी इजाफा होता है.