चालू वित्त वर्ष में गेहूं के निर्यात में रिकॉर्ड उछाल के बीच कृषि उपज एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) देश से गेहूं के निर्यात को और अधिक प्रोत्साहित करने का प्रयास कर रहा है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने यूक्रेन-रुस की लड़ाई के कारण वैश्विक खाद्यान्न आपूर्ति में व्यवधान को कम करने के लिए एजेंसियों को भारत से अनाज का निर्यात बढ़ाने के प्रयास करने को कहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) की हाल की रपट के अनुसार यूक्रेन युद्ध में शामिल देशों का विश्व के गेहूं निर्यात बाजार में करीब एक तिहाई योगदान है।

लड़ाई छिडऩे के बाद वैश्विक बाजार में गेहूं का भाव गत सितंबर की तुलना में एक समय दो गुना हो गया था। अब भी गेहूं का भाव 60 प्रतिशत से अधिक ऊंचा है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार भारत गेहूं निर्यात के लिए मिस्र, तुर्की, चीन, बोस्निया, सूडान, नाइजीरिया, ईरान आदि देशों के साथ चर्चा कर रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2021-22 (अप्रैल-जनवरी) में गेहूं का निर्यात एक साल पहले की इसी अवधि की तुलना में 387 प्रतिशत बढ़कर 1.74 अरब डालर से अधिक रहा। 

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भारत ने पिछले तीन वर्षों में 2.35 अरब डालर का गेहूं निर्यात किया है, जिसमें चालू वित्त वर्ष 2021-22 के पहले दस महीने का निर्यात शामिल हैं। वर्ष 2019-20 में, गेहूं का निर्यात 6.2करोड़ अमरीकी डालर था जो 2020-21 में बढ़कर 55 करोड़ डॉलर हो गया। आधिकारिक जानकारी के अनुसार भारत मिस्र को गेहूं का निर्यात शुरू करने के लिए अंतिम बातचीत कर रहा है, जबकि गेहूं निर्यात शुरू करने के लिए तुर्की,चीन, बोस्निया, सूडान, नाइजीरिया, ईरान आदि देशों के साथ चर्चा चल रही है। 

वाणिज्य मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार एपीडा ने मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार गेहूं का निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख हितधारकों की एक बैठक 17 मार्च आयोजित की थी। गुरुवार की बैठक की अध्यक्षता एपीडा के अध्यक्ष डॉ. एम. अंगमुथु ने की और इसमें व्यापारियों, निर्यातकों, बंदरगाह अधिकारियों, खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालयों, रेलवे और विभिन्न राज्य सरकारों के अधिकारियों के नीति प्रभावितों जैसे प्रमुख हितधारकों की भागीदारी थी। 

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बैठक में रेलवे ने अतिरिक्त गेहूं परिवहन की किसी भी तत्काल मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त रैक उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। बंदरगाह अधिकारियों को गेहूं के लिए समर्पित कंटेनरों के साथ-साथ समर्पित टर्मिनलों को बढ़ाने के लिए भी कहा गया है। गेहूं के बंपर उत्पादन अनुमान को देखते हुए एपीडा ने सभी हितधारकों से कहा है कि वे परेशानी मुक्त गेहूं निर्यात की सुविधा के लिए अपने बुनियादी ढांचे को मजबूत करें। भारत ने पिछले तीन वर्षों में 2.35 अरब डालर का गेहूं निर्यात किया है, जिसमें चालू वित्त वर्ष 2021-22 के पहले 10 महीने का निर्यात शामिल हैं। वर्ष 2019-20 में, गेहूं का निर्यात 6.2 करोड़ अमेरिकी डालर था जो 2020-21 में बढ़कर 55 करोड़ डॉलर हो गया। 

आधिकारिक जानकारी के अनुसार भारत मिस्र को गेहूं का निर्यात शुरू करने के लिए अंतिम बातचीत कर रहा है, जबकि गेहूं निर्यात शुरू करने के लिए तुर्की, चीन, बोस्निया, सूडान, नाइजीरिया, ईरान आदि देशों के साथ चर्चा चल रही है। 2020-21 में, भारत ने यमन, अफगानिस्तान, कतर और इंडोनेशिया जैसे नए गेहूं बाजारों में प्रवेश किया। वाणिज्यिक खुफिया और सांख्यिकी महानिदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, 2020-21 में भारतीय गेहूं के लिए शीर्ष दस आयात करने वाले देश बांग्लादेश, नेपाल, संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका, यमन, अफगानिस्तान, कतर, इंडोनेशिया, ओमान और मलेशिया थे। 2020-21 में भारत के गेहूं निर्यात में शीर्ष दस देशों की मात्रा और मूल्य दोनों ²ष्टि से 99 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है। एपीडा के अध्यक्ष डॉ एम अंगमुथु ने कहा, 'हम राज्य सरकारों और निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों, ट्रांसपोर्टरों आदि जैसे अन्य हितधारकों के सहयोग से अनाज निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मूल्य श्रृंखला में बुनियादी ढांचे के निर्माण पर जोर दे रहे हैं।'

विश्व गेहूँ निर्यात में भारत की हिस्सेदारी एक प्रतिशत से भी कम है। हालांकि, इसका हिस्सा 2016 में 0.14 प्रतिशत से बढ़कर 2020 में 0.54 प्रतिशत हो गया है। 2020 में विश्व के कुल उत्पादन में लगभग 14.14 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ भारत गेहूं का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। भारत सालाना लगभग 10.8 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन करता है जबकि इसका एक बड़ा हिस्सा घरेलू खपत में जाता है।