अभी तक सिर्फ यह कहा जाता था कि पुरूषों आैर महिलाआें को बराबरी का दर्जा दिया जाना चाहिए। लेकिन अब लगता है कि सही मायने में इसे सच होते देखा जा सकता है। असम के बंगार्इगावं जिले में इसकी शुरूआत हो चुकी है। अब आपको असम में महिलाएं भी आॅटो चलाती दिखेंगी। इस पहल के जरिए बगांर्इगांव में महिलाआें को रोजगार से जोड़ने की कोशिश की गर्इ है। इस योजना के तहत 13 महिलाआें को पिंक कलर का आॅटो दिया गया है। आॅटो चलाने वाली ये 13 महिलाएं गरीब परिवार से हैं। इन 13 आॅटाेरिक्शाें में 10 को बगांर्इगांव के रिफाइनरी ने तो 3 को स्टेट बैंक ने स्पान्सर किया। 

 

 
बुधवार को इस कार्यक्रम की शुरूआत की गर्इ। कार्यक्रम में मौजूद लोग भी महिला आॅटो सवारी का हिस्सा बने। बता दें कि देश के कुछ शहरों में एेसी व्यवस्था है लेकिन असम में यह पहली बार हुआ जब महिलाआें को भी राेजगार से जोड़ने के लिए यह कदम उठाया गया है।

 

आेडिशा, सूरत, दिल्ली आैर मुंबर्इ जैसे नगरों में महिला आॅटो ड्राइवर आॅटो चलाते मिल जायेगी। इसके साथ अब असम में सुबह ६ बजे से शाम ६ बजे तक शहीद वेदी दंगतोल आदि मार्गों पर महिला आॅटो चलाते दिख जायेंगी। जिसमें केवल महिला आैर छोटे बच्चे ही सवारी करते मिलेंगे। वहीं इन आॅटो को जीपीएस से भी जोड़ने की बात की जा रही है। सभी महिला आॅटो ड्राइवरों को दो महीने की ट्रेनिंग के बाद सड़क पर आॅटो चलाने के लिए उतारा गया है।