तालिबान अब भारत के पत्रकार दानिश सिद्दीकी की हत्या से पल्ला झाड़ने में जुटा है। बता दें कि अफगानिस्तान पर कब्जे लड़ाई में जुटे तालिबान के स्पिन बोल्दक पर हमले के दौरान दानिश की मौत हो गई थी। वे इस युद्धग्रस्त क्षेत्र में मीडिया कवरेज के लिए गए थे, लेकिन तालिबान के हमले का शिकार हो गए। 

दानिश की इस तरह हत्या से तालिबान की खूब आलोचना हो रही है। इस मामले में चौतरफा घिरा तालिबान अब हत्या में अपना रोल होने से ही इनकार करने में जुटा है। उल्टा पूरी बेशर्मी से वो तर्क ये दे रहा है कि अगर दानिश को वहां कवरेज के लिए आना था तो उन्हें पहले तालिबान से इजाजत लेनी चाहिए थी। इससे पहले अफगानी सेना के कमांडर बिलाल अहमद ने बताया था कि तालिबानियों ने किस हद तक दानिश के शव के साथ बर्बरता की थी। अफगान कमांडर ने इसके पीछे यह कारण बताया था कि दानिश भारतीय थे और तालिबानी भारत से नफरत करते हैं। 

गौरतलब है कि अफगानिस्तान में मारे गए फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी का पार्थिव शरीर रविवार शाम दिल्ली लाया गया। एयर इंडिया का विमान दानिश सिद्दीकी का शव लेकर दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरा। उसके बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कब्रिस्तान में दानिश को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। दानिश सिद्दीकी ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से ही अपनी पढ़ाई की थी। उन्हें 2018 में समाचार एजेंसी रॉयटर्स के लिए काम करने के दौरान पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। शुक्रवार को अफगानिस्तान में अफगान बलों और तालिबान की लड़ाई की कवरेज करने के दौरान उनकी हत्या कर दी गई थी।