पॉपुलर फ्रंट इंडिया (PFI) के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद ED ने दावा किया है कि संगठन ने बिहार के पटना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली को निशाना बनाने की योजना तैयार की थी। PFI 2 जुलाई को पटना में हुई रैली के दौरान विस्फोट की योजना बना रहा था। इसके लिए बकायदा ट्रेनिंग कैंप का भी आयोजन किया गया था। खास बात ये है कि अक्टूबर 2013 में पटना के ही गांधी मैदान में नरेंद्र मोदी की चुनावी रैली में आतंकी हमला हुआ था। तब इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े जिहादी आतंकियों ने रैली में विस्फोट किया था।

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200 करोड़ रुपए से ज्यादा का फंड मिला

बताया जा रहा है कि संगठन को दुनियाभर से 200 करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड भी मिला है। जानकारी के अनुसार यह करोड़ों की रकम न सिर्फ भारत के कई इलाकों से बल्कि विदेशों से भी जमा की गई है। संगठन के पास से इन पैसों का इस्तेमाल देश-विरोधी गतिविधियों में करने के सबूत भी मिले हैं। फरवरी 2020 के दिल्ली दंगे, उसी साल सितंबर में यूपी के हाथरस में सांप्रदायिक सौहार्द को चोट पहुंचाने की नीयत से हुए पीएफआई नेताओं के दौरों में भी इस फंड का इस्तेमाल हुआ। इसके अलावा देशभर में जगह-जगह दंगे भड़काने और आतंक फैलाने की साजिशों, यूपी में संवेदनशील जगहों और अहम व्यक्तियों पर एक साथ हमले की साजिश के खातिर खतरनाक हथियारों और विस्फोटकों को जुटाने में भी इस फंड का इस्तेमाल हुआ।

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15 राज्यों में 93 जगह मारे गए थे छापे

जानकारी के अनुसार आरोपी जिसने यह खुलासे किए हैं उसका नाम शफीक पैठ है।  वहीं कोच्चि में NIA की ओर से दाखिल एफिडेविट में कहा गया है कि इस्लामिक राष्ट्र बनाने के लिए PFI ने युवाओं को लश्कर और ISIS जैसे आतंकी संगठन जॉइन करने के लिए प्रोत्साहित किया। आपको बता दें कि एनआईए के नेतृत्व में कई एजेंसियों ने देश में आतंकी गतिविधियों को समर्थन देने के आरोप में गुरुवार को 15 राज्यों में 93 स्थानों पर एक साथ छापेमारी कर पीएफआई के 106 पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया था। अधिकारियों ने बताया था कि केरल में, जहां पीएफआई के कुछ मजबूत गढ़ हैं, सबसे ज्यादा 22 गिरफ्तारियां की गईं। गिरफ्तार किए गए लोगों में पीएफआई की केरल इकाई के अध्यक्ष सी पी मोहम्मद बशीर, राष्ट्रीय अध्यक्ष ओ एम ए सलाम, राष्ट्रीय सचिव नसरुद्दीन एलमारम, पूर्व अध्यक्ष ई अबूबकर और अन्य शामिल हैं।