पेट्रोल और डीजल की कीमतें भारत में 20 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकती हैं, क्योंकि रूस-यूक्रेन के बीच गहराते तनाव से ग्लोबल क्रूड ऑयल प्राइसेज रिकॉर्ड हाई के करीब हैं। यह बात HDFC बैंक की एक रिसर्च रिपोर्ट में कही गई है। हालांकि, ऑयल मार्केटिंग कंपनियां शायद ही कीमत बढ़ोतरी का पूरा बोझ ग्राहकों पर डालें।

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 रिपोर्ट लिखने वाले एक्सपर्ट्स का मानना है कि केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर सकती है। इस बीच, पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को कहा है कि ऑयल कंपनियां, फ्यूल प्राइसेज तय करेंगी। उन्होंने कहा कि देश में क्रूड ऑयल की कोई कमी नहीं होगी। पुरी ने कहा कि सरकार नागरिकों के सर्वोच्च हित में फैसला लेगी। 

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इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज (ICE) में सोमवार को ब्रेंट फ्यूचर का मई वायदा (मई कॉन्ट्रैक्ट) 139.13 डॉलर के स्तर को छूने के बाद 123.21 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो कि साल 2008 के बाद इसका उच्चतम स्तर है। क्रूड ऑयल की कीमतों में यह तेजी इसलिए आई है, क्योंकि इस बात का डर लगातार बढ़ रहा है कि अमेरिका और यूरोपियन यूनियन, रूस से आयात किए जाने वाले ऑयल पर पूरी तरह पाबंदी लगा सकते हैं। वहीं, मंगलवार को शुरुआती ट्रेड में ब्रेंट फ्यूचर का मई वायदा अपने पिछले बंद स्तर के मुकाबले 2.49 फीसदी की तेजी के साथ 126.28 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था। 

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HDFC बैंक की रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा क्रूड ऑयल प्राइसेज के कारण पेट्रोल-डीजल के पंप प्राइसेज में रिवीजन देखने को मिल सकता है। यह बढ़ोतरी करीब 15-20 रुपये प्रति लीटर की हो सकती है। हालांकि, शायद पूरी बढ़ोतरी का बोझ ग्राहकों पर न डाला जाए। हमारा मानना है कि सरकार एक्साइज ड्यूटी में कटौती करके कम से कम 50 फीसदी की राहत दे सकती है। सरकार ने नवंबर 2021 में पेट्रोल और डीजल की एक्साइज ड्यूटी में क्रमशः 5 और 10 रुपये की कटौती की थी।