रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध लगातार जारी है जिसकी वजह से भारतीय जनता का तेल निकलने वाला हैं। जी हां, क्योंकि अब जल्द ही पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। मुद्रास्फीति के बारे में बढ़ती चिंता के बीच सरकारी अधिकारियों का कहना है कि भारत में चार महीने से अधिक समय में पहली बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि होगी क्योंकि रूस और यूक्रेन के बीच एक सप्ताह से जारी जंग के बीच वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं।

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भारत एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है जो अपनी तेल की जरूरतों का 80% आयात करता है, इस वक्त यूक्रेन संकट से अछूता नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के बाद इसका असर भारत में भी पड़ने वाला है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बाद कंपनियां जल्द ही पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोत्तरी कर सकते हैं। राज्य सरकारों द्वारा संचालित इन कंपनियों ने 4 नवंबर से ईंधन के दामों में बढ़ोत्तरी नहीं की है। ऐसा माना जा रहा है कि यूपी समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के बाद ऐसा फैसला लिया गया था, लेकिन अब जल्द ही ईंधन के दामों में बढ़ोत्तरी हो सकती है।

खबर है कि 7 मार्च को चुनाव खत्म होने के बाद तेल कंपनियां चरणबद्ध तरीके से कीमतें बढ़ाने के लिए स्वतंत्र होंगी। ईंधन की ऊंची कीमतों के कारण कुछ विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं, लेकिन महत्वपूर्ण राज्यों में चुनाव के चलते मोदी सरकार राजनीतिक नुकसान के अंदेश से ईंधन के दामों में बढ़ोत्तरी से बच रही थी। लेकिन अब ईंधन के दामों में बढ़ोत्तरी होना तय माना जा रहा है। हालांकि आगामी 14 मार्च से संसद की बैठक में विपक्षी दल ईंधन कर में कटौती पर जोर देने पर विचार कर रही है।

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गौरतलब है कि बीती 24 फरवरी को रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण करने के बाद तेल की कीमतों में उछाल आया। गुरुवार को ब्रेंट 116 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर उठ गया, जबकि आपूर्ति में व्यवधान ने गेहूं, सोयाबीन, उर्वरक और तांबा, स्टील और एल्यूमीनियम जैसी धातुओं की वैश्विक कीमतों को भी प्रभावित किया है। 

तेल कंपनियों ने सरकार से कहा है कि उन्हें पेट्रोल और डीजल के दाम में 10-12 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की जरूरत है। हालांकि, यदि यह युद्ध जारी रहा तो तेल की कीमतें 30 रूपये तक भी बढ़ सकती है।