पेट्रोल व डीजल की आसमान छूती कीमतों के बीच सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने को कीमतों में वृद्धि को रोकने के लिए ईंधन को जीएसटी के तहत लाने की वकालत की। गडकरी ने कहा कि मैंने एक प्रजेंटेशन के दौरान अधिकारियों से पूछा कि अगर हम ईंधन की कीमतों को जीएसटी के तहत लाते हैं तो इससे राज्यों को फायदा होगा या नहीं।

गडकरी ने मोदी सरकार के चार साल होने पर एक समाचार सम्मेलन में कहा, 'उन्होंने (अधिकारियों) कहा 'हां', उन्हें (राज्यों को) फायदा होगा। लेकिन, गडकरी ने कहा कि राज्य तेल की कीमतों व शराब से जुटाए जाने वाले राजस्व को खोने को लेकर एहतियात बरत रहे हैं। मंत्री ने कहा कि ईंधन की कीमतें अंतर्राष्ट्रीय कच्चे तेल की दर बढ़ने के कारण बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा, 'इससे पहले, हम आयात (ईंधन के) पर सब्सिडी दे रहे थे। जब दरें कम हो गईं, तो सब्सिडी हटा दी गई। हम वैश्विक अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं..पेट्रोल व डीजल की कीमतें उनकी अंतर्राष्ट्रीय दरों में वृद्धि के कारण बढ़ रही हैं।"उन्होंने कहा कि सब्सिडी हटाकर जो धन बचाया गया है, उसी से देश भर के 8 करोड़ परिवारों को सरकार ने मुफ्त में तरल पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) कनेक्शन दिया है।

पेट्रोल पर 41 रूपए टैक्स पेट्रोल: केंद्र सरकार 19.48 रूपए एक्साइज ड्यूटी लेती है। राज्य सरकार तीन तरह के टैक्स वसूलती है। 28 प्रतिशत वैट, एक प्रतिशत सैस और 4 रूपए प्रति लीटर एडिशनल टैक्स। लगभग कुल 21 रूपए 50 पैसे प्रति लीटर। इस तरह दोनों सरकारें 41 रूपए 69 पैसे एक लीटर पेट्रोल से टैक्स वसूलती हैं।

डीजल पर 32 रूपए टैक्स डीजल: केंद्र 15.33 रूपए प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी लेता है। मप्र 22 प्रतिशत वैट और एक प्रतिशत सेस के साथ 15 रूपए 97 पैसे टैक्स लेती है। दोनों सरकार लगभग 31 रूपए 98 पैसे टैक्स वसूलती हैं।

यदि जीएसटी लागू कर दें तो..

पेट्रोल-डीजल को यदि जीएसटी के दायरे में ले आएं तो ईधन की कीमत में भारी कटौती हो सकती है। जीएसटी की अधिकतम दर 28 प्रतिशत है। यदि पेट्रोल-डीजल पर 28 प्रतिशत टैक्स लगाया जाए तो पेट्रोल-डीजल की कीमत 50 रूपए के आसपास आ जाएगी।